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कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ | Karta Kriya sambandhi Anviti sambandhi Asuddhiyan in Hindi


कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ | Karta Kriya sambandhi Anviti sambandhi Asuddhiyan in Hindi

उप शीर्षक:
जब वाक्य में कर्ता और क्रिया की उचित अन्विति अर्थात परस्पर मेल या संबद्धता नहीं होती है तो वाक्य का सार्थक अर्थ ग्रहण करने में काफी कठिनाई होती है।

जब वाक्य में कर्ता और क्रिया की उचित अन्विति अर्थात परस्पर मेल या संबद्धता नहीं होती है तो वाक्य का सार्थक अर्थ ग्रहण करने में काफी कठिनाई होती है। अतः कर्ता और क्रिया के परस्पर संबंध को समझते हुए वाक्य बोलना या लिखना चाहिए।
आइए कर्ता और क्रिया की अन्विति अर्थात परस्पर संबंध था को समझते हैं।

कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ-

कर्त्ता-क्रिया की अन्विति संबंधी अशुद्धियों को दूर करने के लिए निम्नलिखित नियमों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
1. यदि कर्त्ता के स्थान पर आई संज्ञा परसर्ग (कारक चिह्न) रहित है, तो क्रिया उसी के अनुसार बदलती है।
जैसे- लड़कियाँ आम खाती हैं।

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. समास के प्रकार, समास और संधि में अन्तर
2. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
3. वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
4. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
5. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम

2. यदि कर्त्ता तथा कर्म दोनों परसर्ग (कारक चिह्न) सहित हैं तो क्रिया उन दोनों से संबंधित न होकर पुल्लिंग, एकवचन तथा अन्य पुरुष रूप में आती है।
जैसे- लड़कों ने आमों को खाया।

3. कर्त्ता में यदि समान लिंग वाली विभिन्न संज्ञाएँ 'और' से जुड़ी हों तो क्रिया बहुवचन में आती है।
जैसे- मोहन, सोहन और दीपक दिल्ली जा रहे हैं।

4. यदि कर्त्ता में संज्ञाएँ 'या' से जुड़ी हैं तो क्रिया अंतिम पद के अनुसार बदलती है।
जैसे- मोहन, सोहन या सीता जाएगी।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'ज' का अर्थ, द्विज का अर्थ
2. भिज्ञ और अभिज्ञ में अन्तर
3. किन्तु और परन्तु में अन्तर
4. आरंभ और प्रारंभ में अन्तर
5. सन्सार, सन्मेलन जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों
6. उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक शब्द क्या है.
7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

5. कर्त्ता में सर्वनाम पदों का क्रम प्रायः इस प्रकार होता है–
पहले मध्यम पुरुष फिर अन्य पुरुष तथा अंत में उत्तम पुरुष। ऐसे पदबंध में क्रिया अंतिम पद के अनुसार बदलती है।
जैसे- आप, वे और हम लोग बाज़ार चलेंगे।

6. यदि विशेष्य के स्थान पर एक से अधिक संज्ञाएँ हैं तो विशेषण निकटवर्ती विशेष्य के अनुसार होता है।
जैसे- 1. छोटे-बड़े लड़के और लड़कियाँ।
2. छोटी-बड़ी लड़कियाँ और लड़के।

आशा है, कर्त्ता क्रिया की अन्विति (परस्पर संबद्धता या मेल) को समझ लिया होगा। आइए नीचे दिये अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करते हैं।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिकशब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द

अशुद्ध वाक्य–

अ. मोहन कुत्ते को डंडे से मारा।
आ. क्या आप खाना खा लिए हैं।
इ. दरवाजे पर कौन आई है?
ई. मेरा बेटा और बेटी बाजार गई हैं।
उ. इतना मीठा चाय में नहीं पी सकती हूँ।

शुद्ध वाक्य–

अ. मोहन ने कुत्ते को डंडे से मारा।
आ. क्या आपने खाना खा लिया है?
इ. दरवाजे पर कौन आया है?
ई. मेरे बेटे और बेटी बाजार गये हैं।
उ. मैं इतनी मीठी चाय नहीं पी सकती हूँ।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. लोकोक्तियाँ और मुहावरे
4. रस के प्रकार और इसके अंग
5. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
7. अलंकार और इसके प्रकार

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों / विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
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