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अनुतान क्या है? अनुतान के उदाहरण एवं प्रकार || हिन्दी भाषा में इसकी महत्ता || Hindi Bhasha and Anutan

अनुतान― अनुतान अर्थात मुख से निकलने वाले स्वरों की एक लय अर्थात लहर से है। अनुतान के प्रयोग से शब्दों या वाक्यों के भिन्न-भिन्न अर्थों की अनुभूति होती है। इसका मौखिक भाषा में विशेष महत्व है इसके माध्यम से व्यक्ति सीमित शब्दों के प्रयोग कर इच्छित अर्थ की अनुभूति करा देते हैं।

इस प्रकार अनुतान एक सुरलहर है। सुरों के आरोह-अवरोह के क्रम को सुरलहर की संज्ञा दी गई है। सुर एक व्यापक शब्द है, जो सभी घोष-ध्वनियों में अवस्थित है। अनुतान का समानार्थी शब्द 'तान' है। इसे शब्द का अर्थ-परिवर्तक सुर कह सकते हैं। जब हम बोलते हैं, तब वाक्य में एक सुरलहर रहती है। यही कारण है कि पूरे शब्द या वाक्य में सुरलहर का निर्देशन रहता है।

अनुतान वस्तुतः उस सुर को कहते हैं, जिसके कारण शब्द का अर्थ परिवर्तन हो जाता है।
सुरलहर (अनुतान) के मुख्यतः दो भेद हैं―
1. शब्द-सुरलहर।
2. वाक्य-सुरलहर।

तान का भाषा में विधान मिलता है। वाक्य में सुरलहर का प्रयोग किया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं शब्द में भी सुरलहर का प्रयोग देखा जाता है। नीचे शब्द सुरलहर एवं वाक्य सुरलहर के उदाहरण देखें।

1. शब्द-सुरलहर― हम एक शब्द 'अच्छा' का प्रयोग अपने दैनिक जीवन में करते हैं। यदि इसका प्रयोग ह्रस्व, दीर्घ तथा प्लुत के अनुसार करें तो इसके तीन अर्थ निकलते हैं―
जैसे― अच्छा (ह्रस्व), अच्छाऽ (दीर्घ), अच्छाऽऽऽ (प्लुत)
उक्तानुसार हम देखते हैं —
(अ) अच्छा (ह्रस्व) — स्वीकृति
(आ) अच्छाऽ (दीर्घ) — विरोध
(इ) अच्छाऽऽऽ (प्लुत) — प्रतिशोध
अर्थ निकलते हैं।

2. वाक्य-सुरलहर―
वाक्य-सुरलहर से अर्थ-भेद हो जाता है, इसमें शब्दों का क्रम भी बदल जाता है। जैसे―
[क] क्रिया प्रधान वाक्य―
(अ) कौन करेगा?
(आ) करेगा कौन?
उक्त दोनों वाक्यों में हम देखते हैं पहला वाक्य 'कौन करेगा?' इसका अर्थ है― कोई करेगा।
किंतु दूसरे वाक्य 'करेगा कौन?' का अर्थ है— कोई नहीं करेगा, अर्थात यहाँ निषेधात्मक अर्थ का बोध होता है।

[ख] विशेषण प्रधान वाक्य―
(अ) अच्छे आदमी हैं।
(आ) आदमी अच्छे हैं।
उक्त दोनों वाक्यों में हम देखते हैं पहला वाक्य 'अच्छे आदमी हैं।' का अर्थ है सामान्यतः भले हैं। किंतु दूसरे वाक्य में 'आदमी अच्छे हैं।' का अर्थ है बहुत सुंदर आदमी हैं। इसमें विधेयता लक्षित होती है।

इस तरह अनुतान से अर्थ पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। यहाँ तक तक अर्थ परिवर्तन तक हो जाते हैं। अनुतान के प्रयोग द्वारा व्यक्ति बहुत कम शब्दों से अपने भावों को प्रेषित करने में समर्थ होता है। अतः भाषा में अनुतान की जानकारी बहुत आवश्यक और महत्वपूर्ण है।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. लोकोक्तियाँ और मुहावरे
4. रस के प्रकार और इसके अंग
5. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
7. अलंकार और इसके प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिक शब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
11. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार

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1. 'ज' का अर्थ, द्विज का अर्थ
2. भिज्ञ और अभिज्ञ में अन्तर
3. किन्तु और परन्तु में अन्तर
4. आरंभ और प्रारंभ में अन्तर
5. सन्सार, सन्मेलन जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों
6. उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक शब्द क्या है.
7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. समास के प्रकार, समास और संधि में अन्तर
2. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
3. वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
4. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
5. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
6. कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ

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1. विराम चिन्हों का महत्व
2. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
3. लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर भाषा में इनकी उपयोगिता
4. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? इनका वाक्य में प्रयोग
5. पुनरुक्त शब्द एवं इसके प्रकार | पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अन्तर

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3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
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3. काव्य के भेद- श्रव्य काव्य, दृश्य काव्य, प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य, पाठ्य मुक्तक, गेय मुक्तक, नाटक, एकांकी
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4. बानी जगरानी की उदारता बखानी जाइ― केशवदास
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2. बाल्हा मैं बैरागिण हूँगी हो– मीराबाई
3. आचार्य केशवदास– कवि परिचय
4. मीराबाई– कवि परिचय
5. सखी री लाज बैरन भई– मीराबाई

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1. भेजे मनभावन के उद्धव के आवन की– जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'
2. कबीर संगति साधु की– कबीर दास
3. सुनि सुनि ऊधव की अकह कहानी कान– जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'
4. हिंदी पद्य साहित्य का इतिहास– आधुनिक काल
5. कबीर कुसंग न कीजिये– कबीरदास

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1. आए हौ सिखावन कौं जोग मथुरा तैं तोपै– जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'
2. जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे– मैथिलीशरण गुप्त
3. जो जल बाढ़ै नाव में– कबीरदास
4. देखो मालिन, मुझे न तोड़ो– शिवमंगल सिंह 'सुमन'
5. शब्द सम्हारे बोलिये– कबीरदास

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3. हिंदी का इतिहास– भारतेन्दु युग (विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि)
4. हिन्दी का इतिहास– द्विवेदी युग (विशेषताएँ एवं कवि)
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1. छायावाद– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि
2. रहस्यवाद (विशेषताएँ) तथा छायावाद व रहस्यवाद में अंतर
3. प्रगतिवाद– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि
4. प्रयोगवाद– विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण कवि
5. नई कविता– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि

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1. गोस्वामी तुलसीदास– जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ
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1. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' का जीवन परिचय
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3. आत्मकथा क्या होती है? | प्रमुख आत्मकथा लेखक एवं उनकी रचनाएँ
4. संस्मरण क्या है? | प्रमुख संस्मरण लेखक एवं उनकी रचनाएँ
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I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
infosrf.com

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