आप क्या जानते हैं? योजक चिह्न (-) का प्रयोग क्यों और कहाँ होता है? || Yojak chinha ka prayog
जब दो या दो से अधिक शब्दों का सम्बन्ध प्रकट किया जाता है, वहाँ योजक चिह्न (-) लगाया जाता है।
योजक चिह्न : (-) कोष्ठक में लगे चिह्न को योजक चिह्न कहते हैं। जब दो या दो से अधिक शब्दों का सम्बन्ध प्रकट किया जाता है, वहाँ योजक चिह्न (-) लगाया जाता है। इसे संयोजक चिह्न भी कहते हैं।
योजक चिह्न के प्रयोग–
1. दो शब्दों के बीच में 'और' शब्द के स्थान पर-
यथा - माता-पिता
माता और पिता
2. दो शब्दों के बीच 'का' के स्थान पर-
यथा - राज-गृह
राजा का घर
3. पुनरुक्त शब्दों के बीच
यथा - बार-बार
शब्द का दोहराव
4. दो शब्दों के बीच 'न' आने पर-
यथा - कोई-न-कोई
दो समान शब्दों के बीच 'न' के प्रयोग
5. तुलना के लिए सा, सी, से आने पर-
यथा - फूल-सी
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