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Blog ( लेख )

  • BY:RF Temre (607)
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पुनरुक्त शब्द एवं इसके प्रकार | पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अन्तर | Punrukt shabd ke prakar

किसी शब्द की एकसाथ दो बार आवृत्ति होती है तो ऐसे शब्द को पुनरुक्त शब्द कहते हैं।उदाहरण– धीरे-धीरे।

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  • BY:RF Temre (604)
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लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर | भाषा में इनकी उपयोगिता | Lokokti and Muhavara (proverbs and idioms)

लोकोक्ति पूर्ण होती है जबकि मुहावरा वाक्यांश होता है। लोकोक्ति पूर्ण स्वतंत्र होती है, जबकि मुहावरा पूर्ण स्वतंत्र नहीं होता।

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  • BY:RF Temre (602)
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संस्कृत शब्दावली (दैनिक जीवन में प्रयुक्त शब्द) | Sanskrit Vocabulary (Words Used in Daily Life)

दैनिक जीवन में प्रयुक्त शब्द संस्कृत शब्दावली का ज्ञान आवश्यक है क्योंकि संस्कृत हमारी देव भाषा है। आइए संस्कृत शब्दों को जानते हैं।

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  • BY:RF Temre (601)
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प्रश्नवाचक चिह्न ? एवं विस्मयादिबोधक चिह्न ! के प्रयोग की स्थितियाँ | Question mark? and Exclamation mark in Hindi

प्रश्नवाचक चिन्ह से हम परिचित हैं। विस्मयादिबोधक चिन्ह प्रसन्नता, आश्चर्य, घृणा आदि के भावों स्पष्ट करने में सहायक होते हैं।

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  • BY:RF Temre (599)
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कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ | Karta Kriya sambandhi Anviti sambandhi Asuddhiyan in Hindi

जब वाक्य में कर्ता और क्रिया की उचित अन्विति अर्थात परस्पर मेल या संबद्धता नहीं होती है तो वाक्य का सार्थक अर्थ ग्रहण करने में काफी कठिनाई होती है।

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  • BY:RF Temre (596)
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वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार | Type of sentences in hindi

सामान्यतः वाक्य भेद दो दृष्टियों से किया जाता है - 1. अर्थ की दृष्टि से 2. रचना की दृष्टि से। अर्थ की दृष्टि से वाक्य के 8 प्रकार हैं।

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  • BY:RF Temre (512)
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पत्र के प्रकार, पत्र लेखन से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दु | Hindi letter writing- type of letter

पत्र लेखन अनेक प्रकार से होता है, जिसमें, आदेशात्मक, निवेदनात्मक, सूचनात्मक, विवरणात्मक, व्यावसायिक आदि पत्र होते हैं।

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  • BY:RF Temre (511)
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अलंकार और अलंकार के भेद- शब्दालंकार, अर्थालंकार, उभयालंकार | Alankar ke prakar

अलंकार का सामान्य अर्थ है, 'आभूषण' या 'गहना'। अलंकार और अलंकार के भेद- अलंकार के तीन प्रकार- शब्दालंकार, अर्थालंकार, उभयालंकार हैं।

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  • BY:RF Temre (510)
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हिन्दी में विराम चिन्हों का प्रयोग इसके महत्व एवं प्रकार | punctuation mark and it's uses

विराम का मूल अर्थ - रुकना, ठहराव, आराम की स्थिति है। हिन्दी में विराम चिन्हों का प्रयोग इसके महत्व एवं प्रकार को जानेंगे।

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  • BY:RF Temre (509)
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छंद और इसकी मात्राएँ | छंद के प्रकार - मात्रिक छंद, वर्णिक छंद और अतुकांत (मुक्त) छंद

काव्यशास्त्र के नियमानुसार जिस काव्य में मात्रा, वर्ण संख्या, गण, यति, गति, लय तथा तुक आदि नियमों का विचार करके शब्द योजना की जाती है, उसे 'छंद' कहते हैं।

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  • BY:RF Temre (508)
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रस किसे कहते हैं, रस के प्रकार और इसके अंग | Ras kya hai- ras ke prakar aur iske ang

रस के प्रकार 10 हैं। कार्य या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे 'रस' कहते हैं।

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  • BY:RF Temre (507)
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लेखक परिचय - आचार्य रामचंद्र शुक्ल, उषा प्रियंवदा, उदय शंकर भट्ट, डॉ. रघुवीर सिंह, शरद जोशी, रामनारायण उपाध्याय

हिन्दी साहित्य के कुछ लेखकों यथा - आचार्य रामचंद्र शुक्ल, उषा प्रियंवदा, उदय शंकर भट्ट, डॉ. रघुवीर सिंह, शरद जोशी, रामनारायण उपाध्याय का परिचय यहाँ दिया गया है।

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  • BY:RF Temre (505)
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कवि परिचय - सूरदास, तुलसीदास, केशवदास, मीराबाई, कबीर दास, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद | Poets of Hindi Poetry

हिन्दी साहित्य के कवि परिचय में - सूरदास, तुलसीदास, केशवदास, मीराबाई, कबीर दास, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद का परिचय यहाँ दिया गया है।

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  • BY:RF Temre (503)
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काव्य के प्रकार- श्रव्य काव्य, दृश्य काव्य, प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य, महाकाव्य, खंडकाव्य, आख्यानक गीतियाँ

काव्य के प्रकारों में मुख्य दो प्रकार हैं- 1. श्रव्य काव्य 2. दृश्य काव्य। श्रव्य काव्य के दो प्रकार हैं- 1. प्रबंध काव्य, 2. मुक्तक काव्य।

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  • BY:RF Temre (499)
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हिन्दी साहित्य का इतिहास- चार युग- आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल | History of Hindi Literature

हिंदी साहित्य के इतिहास को चार भागों में विभाजित किया गया है- 1. आदिकाल (वीरगाथाकाल) 2. पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल) 3. उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल) 4. आधुनिक काल में बाँटा गया है।

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  • BY:RF Temre (495)
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गद्य साहित्य की गौण (लघु) विधाएँ | secondary genres of prose literature

गद्य साहित्य की गौण विधाओं में जीवनी, आत्मकथा, आलोचना, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, यात्रा-साहित्य, पत्र-साहित्य, साक्षात्कार-साहित्य, गद्य काव्य, डायरी, लघु कथा आदि सम्मिलित हैं.

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  • BY:RF Temre (465)
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Essay of Cow - Main steps of essay writing for primary classes | गाय का निबंध - लेखन के प्रमुख चरण

प्राथमिक शाला में अध्ययनरत विद्यार्थियों हेतु निबंध लेखन की जानकारी आवश्यक होती है।गाय का निबंध लिखने के प्रमुख चरण हैं।

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  • BY:RF Temre (382)
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समग्र शब्द- अनेक शब्दों के लिए एक शब्द | Shabd samuh ke liye ek shabd

अनेक शब्दों के स्थान पर यदि एक सार्थक शब्द जिसे समग्र शब्द भी कहते हैं, इसका प्रयोग होता है तो भाषा बहुत ही उत्तम तथा भावपूर्ण हो जाती है।

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  • BY:RF competition (328)
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हिन्दी शब्द ज्ञान— 'अभिज्ञ' एवं 'भिज्ञ' शब्द में अंतर

'अभिज्ञ' एवं 'भिज्ञ' इन दोनों शब्दों का सामान्य अर्थ है— किसी विषय या क्षेत्र का जानकार या ज्ञानी (जानकारी रखने वाला) किंतु इन दोनों शब्दों में सूक्ष्म अंतर है।

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  • BY:RF competition (322)
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हिन्दी शब्द ज्ञान– दुःख, कष्ट, पीड़ा, वेदना, व्यथा, विषाद,संताप, शोक, दर्द,खेद में अन्तर

(1) दुख — प्रतिकूल (विपरीत), हानिकारक (नुकसानदेह) बातों या क्रियाकलापों के कारण उत्पन्न हुई मानसिक अनुभूति को दुख कहा जाता है।

उदाहरण— फसल के चौपट होने का किसानों को गहरा दुःख है।

हिन्दी शब्द– दुःख, कष्ट, पीड़ा, वेदना, व्यथा, विषाद,संताप, शोक, दर्द,खेद के बारे में जानकारी क्रमशः......

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  • BY:RF competition (318)
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अर्थ के आधार पर -वाचक, लाक्षणिक,वयंग्यार्थक शब्द || Types of words - Hindi Vyakaran

अर्थ के आधार पर शब्दों के प्रकार के दो खण्ड किए जा सकते हैं। 'खंड 1' में साहित्य शास्त्रियों एवं विद्वानों ने तीन भेद किए हैं।

(i) वाचक (वाच्यार्थक) या अभिधार्थ शब्द
(ii) लाक्षणिक या लक्ष्यार्थक शब्द।
(iii) व्यंजक या वयंग्यार्थक शब्द।

अन्य प्रकार—
(i) एकार्थी शब्द
(ii) अनेकार्थी शब्द (बहुअर्थी)
(iii) विलोमार्थी (विपरीतार्थक)
(iv) पर्यायवाची
(v) समानार्थी
(vi) युग्म शब्द
(vii) ध्वनि बोधक शब्द इत्यादि।

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  • BY:RF competition (302)
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Mitra ko patra || letter to friend || मित्र को पत्र || कोरोना काल में पढ़ाई का विवरण

प्रश्न - अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें आपने कोरोना वायरस के दौरान क्या-क्या किया, सम्पूर्ण वर्ष स्कूल गए बगैर भी आपने अपनी पढ़ाई कैसे की तथा आप का मूल्यांकन आपके शिक्षक ने कैसे किया? की जानकारी दी गई हो।

पत्र लेखन

................................................भैरोगंज
...............................................सिवनी
..............................दिनांक-15/03/2020

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  • BY:RF competition (260)
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शब्दों के प्रकार : रचना या बनावट के आधार पर - रूढ़, योगरूढ़, यौगिक शब्द (हिन्दी व्याकरण)

रचना अर्थात बनावट के आधार पर शब्दों के तीन भेद हैं–

(क) रूढ़

(ख) यौगिक

(ग) योगरूढ़

(क) रूढ़ शब्द :– ऐसे शब्द जिनका स्वतंत्र रूप से अस्तित्व होता है और खण्ड करने पर कोई सार्थक अर्थ नहीं निकलता। ये शब्द किसी अन्य शब्द या शब्द खण्डों के मेल से नहीं बनते। ये शब्द सदैव स्वतंत्र रहते हैं रूढ़ शब्द कहलाते हैं।

उदाहरण :– घोड़ा, मुख, पास, चल, बात, आग, गुण, फल, सरल, कठिन, बगीचा, लक्ष्मी, ऐरावत, कुत्ता, किताब, कौवा, नाक, राजा, लड़का, लड़की, छठ, घर, मन, धन, नेत्र, गंगा इत्यादि।

उपरोक्त शब्दों में प्रथम शब्द 'घोड़ा' को देखें तो इसमें 'घो' और 'ड़ा' या 'घ' और 'ओड़ा' शब्द खण्डों से कोई सार्थक अर्थ नहीं निकलता है अतः ऐसे शब्द रूढ़ शब्द कहलाते हैं।

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  • BY:RF competition (235)
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शब्दों के प्रकार : देशज शब्द, विदेशी शब्द एवं संकर शब्द~ हिन्दी भाषा (व्याकरण)

देशज शब्द – वे शब्द जिनकी बनावट (रचना) का पता नहीं चलता और जो न तो संस्कृत भाषा के हैं और न ही विदेशी भाषाओं से आए हैं। ऐसे शब्द अपने ही देश की उपज हैं अर्थात अपने ही देश में बोलचाल से बने हैं जिन्हें देशज या देशी शब्द कहा जाता है।

इस प्रकार के शब्द दो तरह के हैं।

(क) वे शब्द जो आदिवासी जातियों द्वारा अपनाये गए हैं।

(ख) वे शब्द जो लोगों के द्वारा गढ़ (बना) लिए गए हैं। (ध्वन्यात्मक या अनुकरणात्मक शब्द)

(क) 1. आदिवासी जातियों के अंतर्गत कोल, संथाल जातियों द्वारा बनाए गए शब्द जैसे–

कदली
केला
कपास
कौड़ी
गज (हाथी)

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  • BY:RF competition (189)
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शब्द क्या है? शब्दों के प्रकार (उत्पत्ति के आधार पर) – तत्सम एवं तद्भव शब्द

शब्द क्या है?

एक या अधिक ध्वनियों अर्थात अक्षरों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक ध्वनि को शब्द कहते हैं। सार्थकता की दृष्टि से भाषा की मौलिक अथवा लघुतम इकाई शब्द है। शब्द तो सार्थक होता ही है अन्यथा वह शब्द नहीं कहा जाएगा। इस तरह से सार्थक ध्वनि को शब्द कहा जाता है। जहाँ कहीं अकेली ध्वनि सार्थक हो उसे अर्थ की दृष्टि से शब्द ही कहा जाता है।

उदाहरण हम, तुम, मैं, में, वह, पानी, मूर्ख आदि अर्थ प्रकट करने वाले हैं अतः यह सार्थक शब्द हैं।

तत्सम – तद्भव

अंधकार – अंधेरा
अग्नि – आग
अट्टालिका – अटारी
अर्ध – आधा
अश्रु – आँसू
आश्चर्य – अचरज
उच्च – ऊँचा
कोष्ट – कोठा
क्षीर – खीर
क्षेत्र – खेत
गृह – घर
ग्रंथि – गाँठ
ग्रहक – गाहक
घृत – घीं
दुर्बल – दुबला
धूम्र – धुँआ
नग्न – नंगा
नृत्य – नाच
पत्र – पत्ता
पक्व – पक्का
परीक्षा – परख
उज्जवल – उजाला
उत्थान – उठाना
एकत्र – इकट्ठा
कमल – कँवल
काष्ठ – काठ
कर्ण – कान
कर्म – काम
कुंभकार – कुम्हार
कार्य – काज
कुपुत्र – कपूत
कूप – कुँआ
कोकिला – कोयल
चँद्र – चाँद
चक्र – चाक
छिद्र – छेद
जिह्वा – जीभ
ज्येष्ठ – जेठ
जीर्ण – झीना
ताप – ताव
दंड – डंडा
दशम – दसवाँ
दधि – दही
दुग्ध – दूध
द्वौ – दो
बाहु – बाँह
भिक्षा – भीख
भातृ – भाई
मस्तक – माथा
रात्रि – रात
लौहकार – लोहार/लुहार
वृद्ध – बूढ़ा
विकार – बिगाड़
वधू – बहू
सत्य – सच
सूत्र – सूत
हस्त – हाथ
शलाका – सिलाई
खर्पर – खपरा/खपरैल
तिक्त – तीखा
हरिद्रा – हल्दी
गोमल – गोबर
उष्ट्र – ऊंट
पुन्य – पुन्न

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  • BY:RF competition (175)
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लिपियों का इतिहास History of Script

(1) देवनागरी लिपि (Devnagari Script) :–

देवनागरी एक लिपि है, जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा विदेशी भाषाएँ लिखी जाती हैं। देवनागरी बाँये से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा (आड़ी लकीर) है जिसे 'शिरोरेखा' कहते हैं।

Following are the languages ​​written in Devanagari script -

Sanskrit, Pali, Hindi, Marathi, Konkani, Sindhi, Kashmiri, Dogri, Nepali Apart from this, there are many sub-languages ​​like- Tamang Bhasha, Garhwali, Bodo, Angika, Magahi, Bhojpuri, Maithili, Santhali etc. languages ​​are written in Devanagari.

Additionally, Gujarati, Punjabi, Vishnupuria, Manipuri, Romani and Urdu languages ​​are also written in Devanagari in some cases.

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  • BY:RF competition (121)
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Hindi Vyanjan ka vargikaran - vyanjan ke prakar | हिंदी व्यंजनों का वर्गीकरण - व्यंजनों के प्रकार

हिंदी व्यंजनों का वर्गीकरण - व्यंजनों के प्रकार - प्रयत्न के आधार पर – 1.स्पर्श व्यंजन 2. संघर्षी व्यंजन 3. स्पर्श संघर्षी व्यंजन इसी तरह अन्य प्रकार भी हैं।

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  • BY:RF competition (107)
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हिन्दी व्यंजन वर्ण Consonants व्यंजनों के प्रकार- अयोगवाह, द्विगुण आदि क्या हैं?

ऐसे वर्ण जो बिना स्वरों की सहायता के उच्चारित नहीं हो सकते, जिनके उच्चारण में वायु मुख से अबाध गति से नहीं निकलती, व्यंजन वर्ण कहलाते हैं।

हिंदी भाषा में व्यंजनों की कुल संख्या 41 है। जिन्हें अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया है।

(अ) 'क' वर्ग- 'क', 'ख', 'ग', 'घ', 'ङ'

(आ) 'च' वर्ग- 'च', 'छ', 'ज', 'झ', 'ञ'

(इ) 'ट' वर्ग- 'ट', 'ठ', 'ड', 'ढ', 'ण'

(ई) 'त' वर्ग- 'त', 'थ', 'द', 'ध', 'न'

(उ) 'प' वर्ग- 'प', 'फ', 'ब', 'भ', 'म'

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  • BY:RF competition (105)
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हिन्दी शब्द 'किंतु' और 'परंतु' में अंतर 'Kintu' aur 'Parantu' me antar

'किंतु' एवं 'परंतु' दोनों शब्द समानार्थक हैं। इनका प्रयोग वाक्य में किसी कार्य के पूर्ण होने या न होने का कारण बताने के लिए इन शब्दों के बाद आगे की बात कही जाती है।

उदाहरण- (1) मैं तुम्हारे साथ आ सकता था, किंतु मेरी इच्छा ही नहीं हुई।

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  • BY:RF competition (104)
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'संस्कृत' एवं 'हिन्दी'- 'स्वर के प्रकार' Sanskrit and Hindi-Swar ke Prakar

[अ] उच्चारण स्थान के आधार पर 'स्वरों' के प्रकार- 'संस्कृत' एवं 'हिन्दी' (1) कंठ्य - 'अ', 'आ' (2) तालव्य- 'इ', 'ई' (3) ओष्ठव्य - 'उ', 'ऊ' (4) कंठ-तालव्य- 'ए', 'ऐ' (5) कंठोष्ठय - 'ओ', 'औ' (6) मूर्धन्य- 'ऋ', 'ऋ' (7) दंत्य - 'लृ', 'लृ' [ब] जिह्वा के व्यवहृत भाग के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण-

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  • BY:RF competition (100)
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'वर्ण' और 'अक्षर' क्या अलग अलग हैं?Are 'Varna' and 'Akshar' Different?

'वर्ण' बोला जाने वाला छोटा से छोटा टुकड़ा है, किंतु 'अक्षर' समझा जाने वाला छोटे से छोटा टुकड़ा होता है। जैसे कि 'अ', 'आ', 'इ', 'उ' को हम बोल सकते हैं, किंतु इनका छोटा अंश नहीं हो सकता।

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  • BY:RF competition (98)
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Grammar (व्याकरण) - वर्ण क्या है? वर्णों की संख्या- हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में। What is Varna? Number of characters- in Hindi Sanskrit and English.

हिंदी ध्वनियों का वर्गीकरण - सामान्यतः उच्चारण स्थान और उच्चारण की रीति की दृष्टि से किया जाता है। इसी तरह संकट एवं अंग्रेजी में भी वर्णों के भेद निम्नानुसार हैं। "स्वयं राजन्ते इति स्वराः।"

(जो वर्ण स्वयं उच्चारित हो, उन्हें स्वर या (संस्कृत में) 'अच' कहा जाता है।

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  • BY:RF competition (94)
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'सन्सार', 'सन्मेलन' जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों? अनुस्वार के प्रयोग Use of Anuswar

हिन्दी भाषा में कुछ शब्द - जैसे सन्सार, सन्मेलन, अन्श, अन्स,आसंन, सन्मति,जंम/जम्म, समंवय, सामांय, कंया शब्द अशुद्ध है। इन्हें शुद्ध रूप में इस तरह लिखा जाता है- संसार, सम्मेलन, अंश, अंस, आसन्न, सम्मति, जन्म, समन्वय, सामान्य, कन्या।

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व्याकरण क्या है? What is GRAMMAR?

व्याक्रियते भाषा अनेन इति व्याकरणम'।अर्थात जिस विद्या से भाषा की व्याख्या अर्थात उसका विश्लेषण होता है, उसे व्याकरण कहते हैं। Grammar refers to the manner of speaking or writing a language.

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'आरंभ' और 'प्रारंभ' शब्द का प्रयोग कब और कहाँ करें? Aarambh aur Prarambh me antar.

आरंभ :-जब किसी कार्य की शुरुआत प्रथम बार (कार्य का 'आदि') की जाती है तो उसके लिए 'आरंभ' शब्द का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण :- उन्होंने भवन निर्माण आरंभ किया है।

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  • BY:RF competition (63)
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आदि और इत्यादि में अंतर aadi and ityadi me antar

आदि और इत्यादि शब्द का प्रयोग, किसी वाक्य में बहुत से संज्ञा शब्दों के एक साथ आने पर करते हैं। किंतु आदि शब्द एवं इत्यादि शब्दों के प्रयोग की स्थितियां अलग-अलग होती है।

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