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शैशवावस्था इसका स्वरूप, महत्व एवं विशेषताएँ | बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र

बालक के जन्म के पश्चात 5 वर्ष की अवस्था शैशवकाल होती है। बालक की इस अवस्था को “बालक का निर्माण काल” माना जाता है।

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बालविकास एवं शिक्षाशास्त्र : वृद्धि और विकास में अन्तर(Balvikas : Vriddhi & Vikas me antar) Child Development and Pedagogy : Difference between Growth and Development

वृद्धि, विवृद्धि या अभिवृद्धि तीनों समानार्थक शब्द है। जिसका अर्थ शारीरिक शिराओं, अवयवों एवं विभिन्न संस्थानों में बढ़ाव को प्राप्त करने से होता है एवं उनके आकार और परिमाण में परिवर्तन होने से है। शरीर में बढ़ाव होने से शरीर के आंतरिक एवं बाह्य अंगों के विकास से है।
Growth, growth or growth are all three synonyms. Which means attaining physical veins, components and elongation in different institutions and changes in their size and magnitude. The increase in the body is due to the development of internal and external organs of the body.

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विकास के स्वरूप (बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र)
Nature of development- Child Development and Pedagogy

(1) आकार में परिवर्तन (Change in the Size):–

बालक के शारीरिक विकास क्रम में आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर के आकार एवं वजन में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं।

(As the age progresses in the physical development of the child, there are constant changes in body size and weight.)

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उद्योतन सामग्री क्या होती है? सामग्री के प्रमुख उदाहरण
What is Uddyotan Samagri (Stimulating Material) content? Major examples of content material

■■ उद्योतन का अर्थ (Meaning of Udyotan) :-

उद्योतन का अर्थ है, प्रकाशित होना, चमकना या किसी चीज को प्रकटीकरण/प्रस्तुतिकरण होना।

(Udyotana means to be illuminated, shined or disclosed / presented to something.)

वह सामग्री जिसका उपयोग एक शिक्षक छात्रों की कल्पना को प्रखर करने हेतु, उनके विचारों को उत्प्रेरित करने के लिए, भावनाओं को उद्दीप्त करने के लिए करता है, उसे उद्दोतन सामग्री कहा जाता है। शिक्षक अध्यापन के वक्त बालक की श्रवणेन्दिद्रयों को ही नहीं वरन् अन्य इन्द्रियों को भी प्रशिक्षित करता है।

(The material that a teacher uses to spark the imagination of students, to stimulate their thoughts, to stimulate emotions, is called stimulating material. The teacher not only trains the child's hearing while teaching but also other senses.)

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बालविकास के अध्ययन में ध्यान रखे जाने वाली मुख्य बातें।
The main things to be kept in mind in the study of child development

(1) बालक के जन्म से पूर्व एवं जन्म के बाद से परिपक्व होने तक बालक में होने वाले परिवर्तनों की प्रकृति क्या है?

(What is the nature of changes that occur in a child before the child is born and after birth?)

(2) बालक में होने वाले परिवर्तनों का उसके आयु के साथ किस प्रकार का संबंध होता है?

(What kind of relationship does the child have with his age?)

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विकास के अध्ययन की उपयोगिता- 'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र'
Child Development and Pedagogy- Usefulness of study of Development

(अ) बाल पोषण का ज्ञान:-
(Knowledge of child nutrition) : -

बाल विकास के अध्ययन ने समाज के समक्ष दो पहलू प्रस्तुत किए हैं।
1. व्यवहारिक।
2. सैद्धांतिक।

समाज में प्रत्येक शिक्षक एवं अभिभावक दोनों के लिए उक्त दोनों तरह के पक्षों का ज्ञान होना अति आवश्यक है। बाल विकास का क्रमिक ज्ञान भावी माता-पिता एवं उसके संरक्षक को को होगा तो वे उसकी उचित देखभाल कर सकेंगे। मातृत्व पितृत्व जैसे उत्तरदायित्व, आधारभूत प्रश्नों का उत्तर, बाल विकास के गंभीर अध्ययन से ही प्राप्त होता है।

The main goal of the study of child development is that how the development of the child is so that normal behavior can be seen in it. Normal mental and physical development of the child. This study of child development motivates parents to be able to become useful to society only when their children's behavior and development is normal.

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समाजीकरण का अर्थ- शिक्षक चयन परीक्षापयोगी जानकारी ~

Meaning of Socialization ~ Teacher Selection Exam Useful Information

समाजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा मानव को सामाजिक- सांस्कृतिक संसार से न सिर्फ परिचित कराया जाता है बल्कि एक पीढी से दूसरी पीढी तक हस्तांतरित भी किया जाता है।प्रमुख समाज-शास्त्रियों के अनुसार इसकी अवधारणा का प्रयोग दो अर्थों मे किया जाता है- एक अर्थ में बच्चों द्वारा की जाने वाली- 'सामाजिक अनुकूलन की प्रक्रिया' से है तथा दूसरे अर्थ में 'संस्कृति की सीख' को महत्वपूर्ण माना है।

◆ समाजीकरण की विशेषताएँ-

(Characteristics of socialization)

(1) समाजीकरण सीखने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

Socialization is an important learning process.

(2) यह जन्म से मृत्यु तक चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है।

It is a continuous process lasting from birth to death.

(3) इससे समाजिक परिवेश से अनुकूलन तथा व्यकितत्व को विकसित करने की क्षमता प्रदान की जाती है।

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शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology) प्रकृति एवं उद्देश्य(Nature and Aims)

शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान के सिद्धांतों का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग है। शिक्षा मनोविज्ञान दो शब्दों से मिलकर बना है- 'शिक्षा' और 'मनोविज्ञान' । अतः इसका शाब्दिक अर्थ है-'शिक्षा संबंधी मनोविज्ञान'।So in other words we can say that it is the practical and main form of psychology and it is a science to study human behaviour in the process of education.

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Characteristics of Child Development बाल विकास की विशेषताएँ।

(1) विकास व्यक्ति या प्राणी में निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

(2) विकास व्यक्ति के गर्भाधान से लेकर परिपक्वता की स्थिति तक होने वाले परिवर्तन है।

(3) The rate of development does not run the same in all persons are beings persons are beings.

(4) Changes due to evolution vary due to genetics and environment.

(5) Development is a gradual arrangement, it is a progressive series.

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संप्रेषण क्या है? इसकी महत्ता What is communication? Its Importance.

संप्रेषण तकनीकी की 'रीढ़ की हड्डी' है। बिना संप्रेषण के शिक्षण एवं अधिगम दोनों की ही कल्पना नहीं की जा सकती। Communication means the exchange of Information and ideas. As a teacher when we say something to our principal or to students or students tell us something, respond, order, praise or criticize, it means that the process of communication is going on.

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बाल विकास क्या है? इसकी अवधारणा, परिभाषाएँ। What is Child Development? Its Concepts anf Definitions.

(1) जेम्स ड्रेवर के अनुसार :- "विकास प्राणी में प्रगतिशील परिवर्तन है, जो किसी निश्चित लक्ष्य की ओर निरंतर निर्देशित रहता है।"
(2) According to Gassel :- "Development is not just a direct or perception but development can be observed, evaluated and measured. Measurement of growth from physical, mental and behavioural three points of view, can be done."

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