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अधिगम क्या है? || अधिगम की परिभाषाएँ एवं विशेषताएँ || What is Learning - Definitions and Characteristics

अधिगम (Learning)

सामान्य अर्थों में किसी नवीन बात को सीखना अधिगम कहलाता है अर्थात सीखना ही अधिगम है। जन्म लेने के पश्चात् व्यक्ति अपने को एक विशेष प्रकार के भौतिक तथा सामाजिक वातावरण में घिरा पाता है, व्यक्ति की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ती इस भौतिक और सामाजिक वातावरण के अन्दर ही होती है। किंतु इन आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए व्यक्ति को कुछ न कुछ अपने वातावरण में संघर्ष या अनुकूलन करना पड़ता है। इस प्रकार के अनुकूलन के लिए वह अपनी आयु के अनुसार प्राप्त अनुभवों के आधार पर परिवर्तन लाता है। यह परिवर्तन लाना ही एक प्रकार का सीखना या अधिगम है और यही विकास भी है।
अधिगम क्या है, इस सम्बंध में जानकारी प्राप्त करने हेतु विभिन्न विद्वानों के मतों (परिभाषाओं) के बारे में जानना अति आवश्यक है।

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अधिगम की परिभाषाएँ

(1) गेट्स के अनुसार- "अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा अपने व्यवहारों का संशोधन और परिमार्जन करना ही सीखना है।"

(2) गिलफोर्ड के अनुसार- "व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही सीखना है।"

(3) स्किनर के अनुसार- "सीखना व्यवहार में प्रगतिशील सामन्जस्य की प्रक्रिया है।"

(4) क्रो एण्ड क्रो के अनुसार - "सीखना आदतों, ज्ञान और अभिवृत्तियों का अर्जन है।"

(5) क्रानवेक के अनुसार- "सीखना, अनुभव के फल स्वरूप व्यवहार में परिमार्जन द्वारा अभिव्यक्त होता है।"

(6) वुडवर्थ के अनुसार - "नवीन ज्ञान और प्रक्रियाओंको प्राप्त करने की प्रक्रिया सीखने की प्रक्रिया है।"

(7) कौलविन के अनुसार- "अनुभव के आधार पर हमारे पूर्व निर्मित व्यवहार में परिवर्तन की प्रक्रिया ही सीखना है।"

(8) डगलस और हालैण्ड के अनुसार - "सीखना वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति नवीन प्रकार के व्यवहारों में परिवर्तन करता है नवीन व्यवहार को अपनाता है।

(9) ई.ए. पील के अनुसार- "सीखना व्यक्ति में एक परिवर्तन है जो उसके वातावरण के परिवर्तनों के अनुसरण में होता है।

(10) प्रेसी के मतानुसार- "सीखना उस अनुभव को कहते हैं जिसके द्वारा व्यवहार में परिवर्तन या समायोजन होता है और जिससे व्यवहार की नई दिशाएँ प्राप्त होती हैं।"

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अधिगम की विशेषताएंँ

उक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने के पश्चात अधिगम की निम्नलिखित विशेषताएँ निर्धारित की जा सकती हैं।

(1) सीखना परिवर्तन है - सीखना एक प्रकार का परिवर्तन करना ही है। क्योंकि व्यक्ति के द्वारा किसी नवीन ज्ञान को प्राप्त कर उसे व्यवहार में लाया जाता है तो निश्चित ही बालक या व्यक्ति के जीवन में कुछ परिवर्तन आते हैं इसलिए कहते हैं सीखना परिवर्तन है।

(2) सीखना जीवन भर चलता है - अधिगम व्यक्ति के जन्म के पश्चात से प्रारंभ होकर मरते तक चलते रहता है। ऐसा कोई भी पल व्यक्ति के जीवन में नहीं होता जहाँ वह कुछ न कुछ अनुभव करते हुए सीखता न हो। अतः सीखना व्यक्ति के पूरे जीवन काल में चलते रहता है।

(3) सीखना विकास है - जब बालक के द्वारा कोई बात है सीख ली जाती है और उसे अपने व्यवहार में लाया जाता है तब बालक के व्यवहारिक एवं मानसिक क्षेत्र में उन्नति होती है। इस तरह से कहा जा सकता है कि सीखना विकास करना है।

(4) सीखना सार्वभौमिक प्रक्रिया है - सार्वभौमिक का अर्थ होता है सर्वत्र। अधिगम (सीखना) को सार्वभौमिक प्रक्रिया इसलिए माना जाता है क्योंकि अधिगम प्रक्रिया समस्त प्राणियों में होती है। ऐसा कोई प्राणी नहीं है जिसमें अधिगम न होता हो। इसलिए यह एक सार्वभौमिक प्रक्रिया कहलाती है।

(5) सीखना उद्देश्यपूर्ण होता है - अधिगम की यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है। किसी भी प्राणी के द्वारा अधिगम करना एक उद्देश्य को लेकर होता है। यदि हम अपने विद्यार्थियों को किसी अवधारणा का ज्ञान दे रहे हैं या उसे कोई बात सिखा रहे हैं तो उसके पीछे हमारा कोई न कोई उद्देश्य होता है। उदाहरण के लिए एक बालक को कंप्यूटर चलाना सिखाया जाता है तो इसका उद्देश्य है कि वह कई तरह की जानकारियाँ कंप्यूटर से प्राप्त कर सके। अतः यहाँ कंप्यूटर के बारे में सीखने का उद्देश्य कंप्यूटर से अन्य जानकारी प्राप्त करना हुआ।

(6) सीखना समायोजन करना है - एक व्यक्ति या बालक जिस परिवेश में रहता है उसे उस माहौल में ढलने के लिए आवश्यक जानकारियों को प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। यदि व्यक्ति आवश्यक बातों को सीख लेता है तो फिर अपने परिवेश में सहज अनुकूलित हो जाता है अर्थात अपने आप को समायोजित कर लेता है। इस तरह से सीखना समायोजन करना होता है।

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(7) सीखना अनुभवों का संगठन है - सीखना अनुभवों का संगठन इसलिए है क्योंकि बालक सतत रूप से अधिगम करता है और कई तरह की बातों को सीखते रहता है जो उसे उन्नति की राह पर ले जाते हैं। इस तरह बालक के पास ढेर सारी जानकारियों उसके अनुभवों का संगठन होता है जिनके आधार पर वह अपने व्यवहार को परिपक्व और परिमार्जित करता है।

(8) सीखने में सक्रियता आवश्यक है - अधिगम हेतु सक्रियता बहुत आवश्यक होती है। यदि किसी बालक को किसी ज्ञान को प्राप्त करना है या कोई जानकारी हासिल करना चाहता है तो उसे पूर्णतः सजग और सक्रिय रहना होगा। निष्क्रियता की स्थिति में अधिगम संभव नहीं होता है। इसीलिए कक्षा में शिक्षक के द्वारा बच्चों को विभिन्न प्रकार के खेलों, गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय रखा जाता है ताकि वे सहज अधिगम कर सकें।

(9) सीखना खोज करना है - सीखना एक प्रकार की खोज है। इस संबंध में (Mursell) मरसेल कहते हैं- "सीखना उस तथ्य को खोजने और जानने का कार्य है, जिसे व्यक्ति खोजना और जानना चाहता है।"
सामान्य सी बात है यदि बालक या व्यक्ति किसी जानकारी को प्राप्त करना चाहता है तो उसे विभिन्न क्षेत्रों में अग्रसर होना होगा अर्थात खोज करने पर ही वह उस जानकारी को प्राप्त कर पाएगा। इस तरह से कर सकते हैं सीखना खोज करना है।

(10) सीखना नवीन वातावरण की उत्पत्ति है - सीखना नवीन वातावरण की उत्पत्ति है। इस बात को इस तरह से समझ सकते हैं- जैसे एक बालक कोई नवीन ज्ञान को प्राप्त करता है तो वह उसके अनुसार अपने परिवेश में एक बदलाव करता है या स्वयं में परिवर्तन करता है अर्थात एक नए तरह का वातावरण तैयार हो जाता है। निश्चित ही प्राणी के द्वारा नवीन ज्ञान की प्राप्ति के पश्चात परिवर्तन होना स्वाभाविक है। इस तरह से हम कर सकते हैं सीखना नवीन वातावरण की उत्पत्ति है।

(11) सीखना व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों प्रकार से होता है - बालक स्वयं अपने विकास या उन्नति के लिए अधिगम तो करता ही है साथ ही उसे ऐसे व्यवहारों को भी सीखना होता है जो समाज के लिए हितकर हैं। बालक अपनी व्यक्तिगत रुचि एवं कार्य कुशलता के अनुसार कई तरह के व्यवहारों को सीख लेता है। साथ ही उसे सार्वजनिक मान्यताओं से युक्त व्यवहारों को भी सीखना होता है इस तरह से सीखना व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों तरह से होता है।

(12) सीखना अनुकूलन करना है - जन्म के पश्चात बालक परिवार में समायोजित होते हुए आयु बढ़ने के साथ-साथ उसका सामाजीकरण होता है। समायोजन अर्थात अनुकूलन तभी संभव है जब बालक आवश्यक बातों अर्थात व्यवहारों को सीख ले। बिना आवश्यक व्यवहार के कहीं पर भी व्यक्ति का अनुकूलन संभव नहीं है। यदि व्यक्ति किसी परिवेश में अनुकूलित होता है अर्थात भली प्रकार अपने व्यवहारों को प्रदर्शित करता है तो इसका आशय यह है कि उसने उस परिवेश से संबंधित आवश्यक बातों को सीख लिया है। इस तरह से हम कह सकते हैं सीखना अनुकूलन करना है।

(13) सीखना यांत्रिक कार्य न होकर विवेकपूर्ण कार्य है - अधिगम प्रक्रिया यांत्रिक नहीं होती है। व्यक्ति के द्वारा किस व्यवहार को सीखना है, किस व्यवहार को नहीं सीखना है यह विवेक के ऊपर निर्भर करता है। किसी यंत्र में किसी कार्य-विधि को स्थापित किया जाता है तो वह उसी अनुसार कार्य करता है। इसके अलावा अलग से कोई भी कार्य नहीं होता है। किंतु व्यक्ति के द्वारा अधिगम प्रक्रिया सोच समझकर होती है। अपने विवेक के अनुसार व्यक्ति अपने अनुकूल व्यवहार को ही सीखता है। इस तरह हम कह सकते हैं सीखना यांत्रिक न होकर विवेक पूर्ण होता है।

इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. उद्योतन सामग्री क्या होती है
2. किशोरावस्था का स्वरूप
3. प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था काल

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
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