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Blog ( लेख )

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सम्राट हर्षवर्धन का राजवंश, प्रशासन, धर्म, साहित्य, उपलब्धियाँ और जीवन संघर्ष | Dynasty, Administration, Life Struggle of Emperor Harshavardhana

सम्राट हर्षवर्धन ने 606 से 647 ईसवी तक शासन किया। जब उन्होंने थानेश्वर के प्रशासन को अपने हाथ में लिया तब उनकी आयु केवल 16 वर्ष थी।

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गुप्तोत्तर काल के प्रमुख राजवंश | Major Dynasties of the Post-Gupta Period

गुप्त राजवंश का पतन होने के पश्चात कुछ नए राजवंशों का उदय हुआ। इनमें से प्रमुख राजवंश निम्नलिखित हैं- पुष्यभूति राजवंश, मैत्रक राजवंश, मौखरि राजवंश आदि।

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अंग्रेजों का चार्टर अधिनियम | British charter act (East India Company)

चार्टर अधिनियम (1813)- इस अधिनियम को 'ईस्ट इंडिया कंपनी' ने लाया था। इसके अंतर्गत कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया।

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The rule of the Indo-Yavan (Indo-Greek) dynasty in India | भारत में हिंद-यवन (इंडो-ग्रीक) वंश का शासन

सर्वप्रथम हिंद-यूनानी अथवा बैक्ट्रियाई-यूनानी शासकों ने आक्रमण किया। भारत के कुछ क्षेत्रों पर विजय प्राप्त कर ली।

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मगध साम्राज्य का इतिहास | The Magadh Empire time period

प्राचीन भारत में 16 महाजनपद थे। इन महाजनपदों में 4 महाजनपद मगध, कोशल, वत्सअवंती सबसे अधिक शक्तिशाली थे। इन चारों में भी 'मगध महाजनपद' सबसे अधिक शक्तिशाली था।

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जैन धर्म के 24 तीर्थंकर || महावीर स्वामी की पारीवारिक जानकारी || 24 Tirthankaras of Jainism || Family information of Mahavir Swami

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए। जैन धर्म की स्थापना जैनियों के प्रथम तीर्थंकर 'ऋषभदेव' (आदिनाथ) ने की थी। जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक 'वर्धमान महावीर' थे।

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सिकंदर का भारत पर आक्रमण- इसके कारण एवं प्रभाव || Alexander's invasion of India - its causes and effects (यूनानी आक्रमण)

सिकंदर ने झेलम तथा चिनाव के मध्यवर्ती क्षेत्र पंजाब के शासक 'पोरस' पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध को 'हाइडेस्पीच या झेलम (वितस्ता) का युद्ध' कहा जाता है। इस युद्ध मे पोरस को हार तथा सिकंदर को जीत प्राप्त हुई। सिकंदर ने पोरस को बंदी बना लिया। उसके पश्चात उसने पोरस से पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए। तब पोरस ने भारतीय पौरूष को प्रमाणित करते हुए कहा कि तुम मेरे साथ वही व्यवहार करो जो कि, ''एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।''

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भारत का प्राचीन इतिहास– जनपद एवं महाजनपद || Ancient History of India - Janpada and Mahajanapada

वैदिक सभ्यता के पश्चात छठी शताब्दी ईसा पूर्व के लगभग लोग छोटे-छोटे समूहों में नदियों के किनारे बसने लगे थे, इन स्थानों को 'जनपद' कहा जाता है। ये लोग 'आर्य' कहलाते हैं। Arya literally means 'superior (shreshtha)' . Districts have developed only due to mutual merger of Aryan castes. Large and powerful districts are called 'Mahajanapada'

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भारत का इतिहास - बुद्ध के समय के प्रमुख गणराज्य (गणतंत्र) || History of India - Major republics of Buddha's time

गणतंत्र में राजस्व पर प्रत्येक कबीलाई कुलीन का अधिकार हुआ करता था। (In the Republic, every tribe of nobles held authority over the revenue.) उसे 'राजा' के नाम से जाना जाता था। प्रत्येक गणतंत्र शासन में राजा अपने सेनापति के अधीन सेना का प्रबंध करता था। गणतंत्र में 'ब्राम्हण' प्रभावशाली नहीं थे। इस व्यवस्था में कुलीनों की समिति के अंतर्गत कार्य किया जाता था। महात्मा बुद्ध के समय में गंगा घाटी में कई 'गणतंत्रों' के होने के प्रमाण प्राप्त होते हैं।

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मध्यप्रदेश का प्राचीन इतिहास || Ancient History of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश के भोपाल, रायसेन, नेमावर, मोजावाड़ी, छनेरा, महेश्वर, देहगाँव, हंडिया, कबरा, बरखेड़ा, सिघनपुर, पचमढ़ी, आजमगढ़, होशंगाबाद, सागर एवं मंदसौर की अनेक स्थानों पर इन लोगों की निवास करने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इस काल के लोगों में कलात्मक अभिरुचि थी। होशंगाबाद के पास की गुफाओं, भोपाल के पास भीमबेटका की कंदराओं और सागर के पास पहाड़ियों से शैलचित्र प्राप्त हुए हैं, जो कि उनकी कलात्मक अभिरुचि के प्रमाण हैं। शैलचित्र मंदसौर की शिवनी नदी के निकट की पहाड़ियों, रायसेन, नरसिंहगढ़, पन्ना, रीवा, आजमगढ़, रायगढ़ तथा अंबिकापुर के कंदराओं में प्राप्त हुए हैं।

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वैदिक सभ्यता - ऋग्वैदिक काल || Vedoc Civilization - Rrigvaidik Era

वैदिक सभ्यता (Vedoc Civilization) – भारतवर्ष में सिंधु सभ्यता के बाद जिस सभ्यता का प्रादुर्भाव हुआ, उसे 'वैदिक सभ्यता' कहा जाता है। इसे 'आर्य सभ्यता' भी कहते हैं। इस सभ्यता में वेदों का विशेष महत्व है। वेदों की संख्या 4 है - ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इनमें से 'ऋग्वेद' सबसे प्राचीन है।

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सिन्धु सभ्यता में जीवन || Life in indus civilization

हड़प्पाई (सिन्धु) लिपि – हड़प्पा की लिपि सेलखड़ी की आयताकार मुहरों, ताँबे की गुटिकाओं आदि पर प्राप्त होते हैं। इस लिपि में लगभग 64 मूल चिन्ह प्राप्त हुए हैं। इस लिपि का सबसे प्राचीन नमूना सन् 1853 ई. में प्राप्त हुआ था। कुछ सालों बाद सन् 1923 ई. तक यह पूरी लिपि प्रकाश में आ गई थी। यह लिपि पिक्टोग्राफ अर्थात् चित्रात्मक थी।

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भारत का इतिहास : सिंधु सभ्यता के प्रमुख स्थल || History of India: Major sites of Indus Civilization

हड़प्पा : सिंधु घाटी सभ्यता की खोज में सर्वप्रथम इसी नगर को खोजा गया था। इसकी खोज सन् 1921 ई. में की गई थी। यह नगर रावी नदी के बाएँ तट पर स्थित है। यह वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मोंटगोमरी जिले में है। 'स्टुअर्ट पिग्गट' नामक विद्वान ने इसे 'अर्द्ध औद्योगिक नगर' कहा है। उन्होंने हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को 'एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानी' कहा है। हड़प्पा के निवासियों का एक बड़ा भाग तकनीकी उत्पाद, व्यापार तथा धर्म के कार्यों में संलग्न रहा करता था। नगर की रक्षा हेतु पश्चिम दिशा की ओर दुर्ग का निर्माण किया गया था। यह दुर्ग 415 मीटर लंबा एवं 195 मीटर चौड़ा है। जिस टीले पर यह दुर्ग बना है उसे 'व्हीलर' नामक विद्वान ने 'माउंट ए बी' कहा है।

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के साहित्यिक स्त्रोत : वेद (History of India: literary sources to know ancient Indian history: Vedas)

वेद : वेदों की संख्या चार है - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद

Vedas: The number of Vedas is four - Rigveda, Yajurveda, Samaveda and Atharvaveda .

ऋग्वेद : यह सबसे प्राचीनतम वेद है। यह ऋचाओं से बद्ध है। इसमें कुल 10 मंडल, 1028 सूक्त, 10,580 ऋचाएँ हैं। इस वेद का अध्ययन करने वाले ऋषि को 'होतृ' कहा जाता है। ऋग्वेद के दो ब्राह्मण ग्रंथ हैं : ऐतरेय एवं कौषितकी अथवा शंखायन। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा ऋग्वेद को विश्व मानव धरोहर के साहित्य में सम्मिलित किया गया है।

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भारत का इतिहास : प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के पुरातात्विक स्रोत।
History of India: Archaeological Sources of the Study of Ancient Indian History.

अभिलेख पाषाण शिलाओं, स्तंभों, ताम्रपत्रों, दीवारों तथा प्रतिमाओं पर उत्कीर्ण हैं। विश्व के सबसे प्राचीन अभिलेखों में मध्य एशिया के बोगाज़कोई से प्राप्त अभिलेख हैं। इन पर वैदिक देवताओं के नाम मिलते हैं। इनसे ऋग्वेद की तिथि ज्ञात की जा सकती है।

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भारतीय इतिहास में सिंधु सभ्यता का स्थान - विश्व की प्रथम चार सभ्यताएँ - मेसोपोटामिया, मिस्र, सिंधु, और चीनी सभ्यता
Place of Indus Civilization in Indian History - First Four Civilizations of the World - Mesopotamia, Egyptian, Indus and Chinese Civilization

1. मेसोपोटामिया सभ्यता : यह सभ्यता 'टिगरिस' एवं 'यूफरेटस' नदियों के तट पर विकसित हुई थी।
2. मिस्र सभ्यता : यह सभ्यता 'नील' नदी के तट पर विकसित हुई थी।
3. सिंधु सभ्यता : यह सभ्यता 'सिंधु' नदी के तट पर विकसित हुई थी।
4. चीनी सभ्यता : यह सभ्यता 'ह्वांग - हो' नदी (पीली नदी) के तट पर विकसित हुई थी।

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भारतीय इतिहास के आरंभिक नगर : सिन्धु (हड़प्पा) सभ्यता
Early Cities in Indian History: Indus (Harappan) Civilization

सिंधु सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता के शहरों का निर्माण 4700 साल पहले (2700 ईसा पूर्व) हुआ था। इस सभ्यता को 'हड़प्पा सभ्यता' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि हड़प्पा इस सभ्यता का एक शहर था और इसकी खोज सबसे पहले हुई थी। अतः बाद में इस तरह के मिलने वाले इस तरह के सभी पूरास्थलों में जो इमारतें प्राप्त उन्हें हड़प्पा सभ्यता की इमारत कहा गया। सिंधु सभ्यता के नगर पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत, भारत के राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा प्रांतों में मिले हैं। पुरातत्वविदों को इन सभी स्थलों में कई वस्तुएं मिली हैं। उदाहरण - मिट्टी के बर्तन, इन बर्तनों पर काले रंग के चित्र बने हुए थे, मुहरे, मनके, पत्थर के बाट, ताँबे के उपकरण, पत्थर के लंबे ब्लेड आदि।

The Indus civilization is one of the oldest civilizations in the world. The cities of this civilization were built 4700 years ago (2700 BC) . This civilization is also known as 'Harappan civilization' , as Harappa was a city of this civilization and was first discovered. Therefore, later, the buildings which were found in all such complete sites were called as Harappan civilization buildings. The cities of the Indus civilization have been found in Sindh and Punjab provinces of Pakistan, Rajasthan, Gujarat, Punjab and Haryana provinces of India. Archaeologists have found many objects in all these sites. Examples - Pottery, black images were made on these utensils, faces, beaded, stone weights, copper tools, long stone blades etc.

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इतिहास - दक्षिण भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

ऐसा माना जाता है कि पूर्व मध्यकाल में देश के उत्तरी और दक्षिणी भाग के राज्यों के बीच निकटता बढ़ी थी। इस निकटता 3 प्रमुख कारण थे।

(1) दक्षिण भारत के उत्तरी भाग के राज्यों ने अपने राज्य अधिकार को गंगा नदी की घाटी तक बढ़ाने का प्रयत्न किया।

(2) दक्षिण भारत में शुरू हुए धार्मिक आंदोलन उत्तर भारत में भी लोकप्रिय हो गए।

(3) दक्षिण भारत के विभिन्न शासकों ने धार्मिक कर्मकांडों और अध्ययन अध्यापन के लिए उत्तर भारत के ब्राह्मण वर्ग को दक्षिण भारत में बसने के लिए आमंत्रित किया।

दक्षिण भारत में आने वाले ब्राह्मणों को भूमि प्रदान की गई, परिणाम स्वरुप विशाल भारत देश के दोनों भागों के राज्यों के बीच निकटता बढ़ने लगी। उत्तर और दक्षिण भारत के राज्य उस प्रकार अलग-अलग नहीं रहे जिस प्रकार से वे प्राचीन काल में थे।

आठवीं शताब्दी में दक्षिण (भारत विंध्य पर्वत के आने का भारत) अनेक छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया था। इनमें प्रमुख राजवंश थे- पल्लव, राष्ट्रकूट, चालुक्य, चोल और पाण्डय।

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सिंधु घाटी सभ्यता Indus Valley Civilization

परिचय- यह एक कांस्ययुगीन सभ्यता है। इसका उद्भव ताम्रपाषाण काल में भारत के पश्चिमी भाग में हुआ था। इसका विस्तार पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में भी है।

It is a Bronze Age Civilization. It originated in the western part of India, during the Tamrapolithic period.

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