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बंगाल का सेन वंश- विजयसेन, बल्लालसेन और लक्ष्मण सेन | Sen dynasty of Bengal- Vijayasena, Ballalsen and Lakshmana Sen

  • BY:RF Temre
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भारतवर्ष के बंगाल से पाल वंश का पतन होने के बाद सेन राजवंश के शासकों का शासन आरंभ हुआ। यह बंगाल का महत्वपूर्ण राजवंश है। सेन वंश का संस्थापक 'सामंतसेन' था। इस वंश की स्थापना 'राढ़' नामक स्थान पर की गई थी।

After the decline of the Pala dynasty from Bengal of India, the rule of the rulers of the Sen dynasty began. It is an important dynasty of Bengal. The founder of the Sen dynasty was 'Samantasena'. This dynasty was established at a place called 'Radh'.

सेन वंश के महत्वपूर्ण शासक निम्नलिखित हैं-
1. विजयसेन
2. बल्लालसेन
3. लक्ष्मण सेन

The important rulers of the Sen dynasty are-
1. Vijayasena
2. Ballalsen
3. Laxman Sen

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विजयसेन- ये सेन वंश के संस्थापक सामंतसेन के उत्तराधिकारी थे। इन्होंने बंगाल पर 1095 से 1158 ईसवी तक शासन किया। विजयसेन इस राजवंश का पहले महान शासक थे। बंगाल के इतिहास में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान बहुत से युद्ध किए और उन युद्धों में विजय प्राप्त की। उनकी इन यशस्वी विजयों का उल्लेख 'देवपाड़ा प्रशस्ति' में मिलता है। इस प्रशस्ति की रचना कवि धोयी द्वारा की गई थी। कवि धोयी के अनुसार विजयसेन ने नेपाल के नव्य या नान्य तथा मिथिला के वीर नामक शासकों को युद्ध में पराजित किया था। विजयसेन ने 'विक्रमपुर' और 'विजयपुरी' नाम की दो महत्वपूर्ण राजधानियों की स्थापना करवायी थी। विजयसेन की उपलब्धियों, वीरगाथा एवं विजयों से बहुत से कवि एवं विद्वान प्रभावित थे। इनमें से श्री हर्ष नाम के कवि ने भी विजयसेन की प्रशंसा की और इस पर उन्होंने 'विजयप्रशस्ति' नामक काव्य की रचना की। विजयसेन को 'अरिराजवृषभशंकर' नामक उपाधि से सम्मानित किया गया था। इस उपाधि से स्पष्ट हो जाता है कि विजयसेन शैव धर्म के अनुयायी थे। इसके अतिरिक्त विजयसेन को प्रदान की गयी अन्य महत्वपूर्ण उपाधियाँ परमेश्वर, महाराजाधिराज और परमभट्टारक थीं।

Vijayasen- He was the successor of Samantasena, the founder of the Sen dynasty. He ruled Bengal from 1095 to 1158 AD. Vijayasena was the first great ruler of this dynasty. They have an important place in the history of Bengal. He fought many wars during his reign and won those wars. The mention of his successful victories is found in 'Devapara Prashasti'. This prashasti was composed by the poet Dhoyi. According to the poet Dhoyi, Vijaysen defeated the rulers of Nepal named Navya or Nanya and Veer of Mithila in the war. Vijaysen had established two important capitals named 'Vikrampur' and 'Vijaypuri'. Many poets and scholars were influenced by Vijayasena's achievements, heroism and victories. Of these, a poet named Shri Harsha also praised Vijaysen and on this he composed a poem called 'Vijayaprashasti'. Vijayasena was awarded the title 'Arirajavrishabhashankar'. It is clear from this title that Vijayasena was a follower of Shaivism. Apart from this other important titles conferred on Vijayasena were Parameshwara, Maharajadhiraja and Parambhattaraka.

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बल्लालसेन- ये महान शासक विजयसेन के उत्तराधिकारी थे। इन्होंने बंगाल पर 1158 से 1178 ईसवी तक शासन किया। बल्लालसेन का अधिकार मिथिला एवं उत्तरी बिहार पर था। इसकी पुष्टि 'लघुभारत' तथा 'बल्लालचरित' नामक ग्रंथों से होती है। इन महत्वपूर्ण प्रांतों के अलावा बल्लालसेन का वारेन्द्र, राधा, बागडी व बंगाल नामक चार प्रांतों पर भी शासन था। बल्लालसेन ने अपने शासनकाल के दौरान बहुत से विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया। वे स्वयं एक विद्वान थे। उन्होंने 'दानसागर' नामक ग्रंथ की रचना की थी। इसके अलावा उन्होंने 'अद्भुतसागर' नामक ग्रंथ की रचना भी आरंभ की थी, किंतु वे इसे पूर्ण नहीं कर सके। बल्लालसेन ने बंगाल में जाति प्रथा और कुलीन प्रथा को संगठित किया था। उन्हें बंगाल के ब्राह्मणों और तथा कायस्थों में कुलीन प्रथा के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। बल्लालसेन ने परममाहेश्वर, घोडेश्वर, परमभट्टारक, नि:शंकशंकर तथा महाराजाधिराज जैसी महत्वपूर्ण उपाधियाँ धारण की थी। घोडेश्वर व नि:शंकशंकर जैसी उपाधियों से स्पष्ट हो जाता है कि बल्लालसेन शैव धर्म के अनुयायी थे। अपने जीवन के अंतिम समय में उन्होंने संन्यास ले लिया था।

Ballalasena- He was the successor of the great ruler Vijayasena. He ruled Bengal from 1158 to 1178 AD. Ballalsen had authority over Mithila and northern Bihar. This is confirmed by texts named 'Laghubharat' and 'Ballalcharit'. Apart from these important provinces, Ballalsen also ruled over four provinces namely Varendra, Radha, Bagdi and Bengal. Ballalsen provided patronage to many scholars during his reign. He himself was a scholar. He had composed a treatise called 'Danasagar'. Apart from this, he also started the composition of a book called 'Adbhutsagar', but he could not complete it. Ballalsen organized the caste system and aristocratic system in Bengal. He is known as the originator of the aristocratic system among the Brahmins and Kayasthas of Bengal. Ballalsen had assumed important titles like Paramaheshwar, Ghodeshwar, Parambhattaraka, Nishanshankar and Maharajadhiraja. It is clear from the titles like Ghodeshwar and Nishanshankar that Ballalsen was a follower of Shaivism. He retired at the end of his life.

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लक्ष्मण सेन- लक्ष्मण सेन बल्लाल सेल के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने लगभग 1179 से 1205 ईसवी तक शासन किया। उन्होंने संपूर्ण बंगाल पर शासन किया। उन्होंने लक्ष्मणवती अथवा लखनौती नामक राजधानी की स्थापना की थी। यह बंगाल की प्राचीन राजधानी गौड़ के पास है। अपने शासनकाल के दौरान लक्ष्मण सेन ने गहढ़वाल वंश के शासक जयचंद को युद्ध में पराजित किया था। 1202 ईस्वी के दौरान बख्तियार खिलजी ने लखनौती पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया था। इस दु:खद घटना का उल्लेख मिनहाज ने अपनी रचना 'तबकात-ए-नासिरी' में किया है। लक्ष्मण सेन ने बहुत से विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया। श्रीधर उनके के दरबारी कवि थे। लक्ष्मण सेन स्वयं भी एक विद्वान थे। उन्होंने 'अद्भुतसागर' नामक ग्रंथ को पूर्ण किया। इस ग्रंथ की शुरुआत लक्ष्मण सेन के पिता बल्लालसेन द्वारा की गई थी। लक्ष्मण सेन को 'परमभागवत' नामक उपाधि से सम्मानित किया गया था। इस उपाधि से स्पष्ट होता है कि वे वैष्णव धर्म के अनुयायी थे। लक्ष्मण सेन ने 'लक्ष्मण संवत्' का प्रचलन किया था।

लक्ष्मण सेन की राजसभा में बहुत से विद्वान थे। इनमें से महत्वपूर्ण लेखक एवं उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं-
1. धोयी- इनकी रचना 'पवनदूत' है।
2. जयदेव- इनकी रचना 'गीत गोविंद' है।
3. हलायुध- इनकी रचना 'ब्राह्मणसर्वस्व' है। हलायुध लक्ष्मण सेन की राजसभा के लेखक होने के साथ-साथ वहाँ के प्रधान न्यायाधीश एवं मुख्यमंत्री भी थे।

Lakshman Sen had many scholars in his court. The following are the important authors and their works-
1. Washi- His creation is 'Pawandoot'.
2. Jaydev- His composition is 'Geet Govind'.
3. Halayudh- His creation is 'BrahmanSarvava'. Halayudh was the author of the Rajya Sabha of Laxman Sen as well as the Chief Justice and Chief Minister there.

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आशा है, उपरोक्त जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।
धन्यवाद।
R F Temre
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