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सरकारी पत्र क्या होते हैं? || सरकारी पत्रों के प्रकार इनकी विशेषताएँ || पत्र के अंश एवं इसका प्रारूप


सरकारी पत्र क्या होते हैं? || सरकारी पत्रों के प्रकार इनकी विशेषताएँ || पत्र के अंश एवं इसका प्रारूप

उप शीर्षक:
पत्र लेखन हिन्दी एक महत्वपूर्ण विधा है। पत्र कई तरह की होते हैं जिनमें सरकारी पत्र का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

पत्र लेखन हिन्दी एक महत्वपूर्ण विधा है। पत्र कई तरह की होते हैं जिनमें सरकारी पत्र का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
सरकारी पत्र से तात्पर्य उन पत्रों से है जिनका प्रयोग विविध सरकारी अधिकारियों के मध्य अथवा सरकारी काम के लिये किसी व्यक्ति, फर्म या व्यावसायिक फर्मों को लिखे जाते हैं।

सरकारी पत्रों का महत्व - वैसे तो राजकाज एवं शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकारी पत्र महत्व रखते हैं। जो व्यक्ति सार्वजनिक या राजकीय सेवा में संलग्न होते हैं या किसी सरकारी दफ्तर में कार्य करना चाहते हैं उन्हें सरकारी पत्रों के लिखे जाने की जानकारी होना अति आवश्यक है। यदि किसी कर्मचारी को सरकारी पत्र लेखन कला नहीं आती है अर्थात वे इस कला से अपरिचित होते हैं तो उस कार्यालय अर्थात तन्त्र को चलाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए किसी शासकीय तंत्र में कर्मचारियों/अधिकारियों को सरकारी पत्र लेखन कला का ज्ञान होना अति आवश्यक होता है।

सरकारी पत्र की विशेषताएँ - एक सरकारी पत्र की निम्नलिखित विशेषताएँ होना चाहिए।
(i) स्पष्टता एवं शुद्धता - सरकारी पत्र का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि उसकी विषय सामग्री स्पष्ट एवं शुद्ध होनी चाहिये तथा इसमें विषय का सीधा उल्लेख होना चाहिए।

(ii) संक्षिप्तता - सरकारी पत्रों में संक्षिप्तता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए क्योंकि सरकारी अफसर को कई महत्वपूर्ण पत्रों को देखना होता है। अतः वह उस पत्र को शीघ्र पढ़ सकें। परन्तु संक्षिप्तता के साथ यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई तथ्य छूट न जाये।

(iii) भाषा-शैली - सरकारी पत्रों की भाषा शैली पर ध्यान रखते हुए सरल और परिमार्जित भाषा का प्रयोग करते हुए छोटे वाक्यों का प्रयोग किया जाना चाहिये, जिससे कि पत्र से एक अर्थ के अलावा दूसरा अर्थ न निकाला जा सके।

(iv) पूर्णता - पूर्णता से आशय यह लिया जाना चाहिए कि जो भी आवश्यक तथ्य या आँकड़े हों, पत्र में समायोजित होने चाहिए एवं कोई आवश्यक जानकारी छूटनी नहीं चाहिए।

(v) क्रमबद्धता - सरकारी पत्र क्रमबद्ध तरीके से तैयार कर पैराग्राफ बनाना चाहिए और प्रयास यह होना चाहिए कि एक पत्र में एक ही विषय पर चर्चा की गई हो।

(vi) नम्रता - सरकारी पत्रों में भी व्यावसायिक पत्रों की भाँति नम्रता का होना आवश्यक है चाहे एक उच्च अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारी को ही क्यों न लिखा जा रहा हो, प्रत्येक व्यक्ति को यथोचित मान मिलना चाहिए।

(vii) नियत प्रारूप - सरकारी पत्रों का प्रारूप नियत होता है, अतः इसका प्रारूप बदलने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

(viii) शिष्टाचार - सरकारी पत्र शिष्टाचार युक्त होना चाहिए एक उच्च अधिकारी द्वारा भी अपने अधीनस्थ को महोदय आदि का सम्बोधन करना चाहिए। यदि पत्र में कभी तीखी टीका करना हो तो, उसे मधुर शब्दों में पिरोकर किया जाना चाहिए।

सरकारी पत्र के अंग - सरकारी पत्र के अलग-अलग भाग होते हैं। इनकी जानकारी पत्र लेखक को होना चाहिए ये भाग निम्नलिखित हैं।

(क) शीर्षक, विभाग का नाम - सरकारी पत्र के सबसे ऊपर विभाग का नाम लिखा जाना चाहिए।
उदाहरण -
(i) कार्यालय कलेक्टर, सिवनी (म.प्र.)
(ii) संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण म.प्र.
(iii) मध्य प्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग

(ख) क्रमांक - सरकारी पत्रों के शीर्षक के नीचे बायीं ओर क्रमांक अंकित किया जाता है जैसे -
(i) भारत सरकार, गृह मंत्रालय पत्र क्रमांक / सामा. व्य./193/xx/2021-22
(ii) कार्यालय अधीक्षक, आई.टी.आई. सिवनी क्रं. / औप्रसं/ सिवनी / स्था. /43/जम/ 436/2021-22

(ग) विषय व सन्दर्भ - क्रमांक के बाद विषय का स्थान आता है। विषय में पत्र में कही गई बात का सार होता है, विषय पढ़कर ही पाठक को ज्ञात हो जाति है कि इस पत्र में क्या बात कही गई है। विषय के बाद सन्दर्भ का क्रम आता है। सन्दर्भ में उस पक्ष का हवाला दिया जाता है, जिस पत्र के उत्तर में यह पत्र लिखा जा रहा है। जैसे -
विषय - जमा राशि से फर्नीचर क्रय करने के विषय में।
सन्दर्भ - आपका पत्र क्रमांक फ.क्र.43/ सम/xx/3017 दिनांक DD/MM/2022

(घ) अभिवादन - सरकारी पत्रों में अभिवादन की प्रथा है और सन्दर्भ के बाद 'महोदय' लिखा जाता है। अभिवादन के बाद अल्पविराम लगाया जाता है। जैसे -
महोदय,

(ङ) पत्र का मुख्य भाग - अभिवादन के बाद पत्र का मुख्य भाग प्रारम्भ होता है और इसे आवश्यकतानुसार पैराग्राफ्स में विभक्त कर विषय से सम्बन्धित जानकारी का उल्लेख किया जाता है। इसके प्रथम पैराग्राफ के सन्दर्भ का उल्लेख करना चाहिए। जैसे -
(१) उपयुक्त विषय एवं सन्दर्भ में मुझे निवेदन करना है कि ------------------------
या
(२) आपके पत्र क्रमांक ----- दिनांक ------ ---------------के सन्दर्भ में मुझको सूचित करने का निर्देश हुआ है कि -------------
या
(३) इस कार्यालय के पत्र संख्या ------ दिनांक ---------- के विषय में आपका ध्यान आकर्षित करते हुये निवेदन है कि --------------------

(च) हस्ताक्षर व पद - अन्त में बारी आती है हस्ताक्षर व पद की हस्ताक्षर के नीचे नाम स्पष्ट अक्षरों में लिखा जाना चाहिए, फिर पद नाम का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए। जैसे -
XYZ
अधीक्षक
आई.टी.आई.कोनी जबलपुर म.प्र.

(छ) संलग्न - यदि पत्र के साथ कोई अन्य कागज भेजे जा रहे हों तो, पत्र के बायीं ओर संलग्न लिखकर उसका उल्लेख करना चाहिए। जैसे - संलग्न - उपरोक्तानुसार

(ज) पृष्ठांकन - यदि पत्र की प्रतियाँ अन्य अधिकारियों के पास भेजी जानी हो तो इसका उल्लेख पतों के साथ किया जाना चाहिए। जैसे - प्रतिलिपि -
(१) संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, सागर को आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित।
(२) श्री abc नायक, कार्यपालन सहायक कार्यपालक कार्यालय सिवनी।

(झ) टाइपिस्ट की पहचान - पृष्ठांकन के नीचे टाइपिस्ट को संक्षेप में बायीं तरफ अपना लघु नाम उदाहरणार्थ -
K.S. पटेल, T.K. वर्मा आदि टाइप कर देना चाहिए। जिससे टाइपिस्ट की पहचान हो जाती है।

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सरकारी पत्रों के प्रकार

1. सरकारी पत्र
2. अर्ध-सरकारी पत्र
3. ज्ञापन
4. परिपत्र
5. पृष्ठांकन
6. स्मृति पत्र
7. अधिसूचना
8. घोषणा
9. प्रस्ताव या संकल्प
10. प्रेस विज्ञप्ति
11. अध्यादेश
12. त्रुटि सुधार
13. कार्यालय आदेश
14. टैण्डर
15. सूचना

एक सरकारी पत्र का प्रारूप (उदाहरण)

म.प्र. शासन, जनशक्ति नियोजित
विभाग, भोपाल (म.प्र.)
पत्र क्र. विविधि / 00000 / भोपाल, दिनांक DD/MM/2022
प्रति,
संचालक, रोजगार एवं प्रशिक्षण म.प्र.
9, सिविल सेन्टर, मढ़ाताल, जबलपुर।
विषय - प्रशिक्षण स्तर में सुधार लाने बावत्।
सन्दर्भ - केन्द्र सरकार श्रम विभाग का पत्र क्र. 000 दिनांक DD/MM/2022
महोदय,
----------------------
-------------------------------
-------------------------------
-------------------------------
भवदीय
abc शर्मा
अवर सचिव
मध्यप्रदेश शासन
जनशक्ति नियोजन विभाग, भोपाल

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