TET Exam पर्यावरण पेडागाजी नोट्स : पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और इसकी आवश्यकता, पर्यावरणीय शिक्षा का महत्व एवं उद्देश्य
प्राथमिक शिक्षा में पर्यावरण अध्ययन का महत्व और प्रभावी शिक्षण दृष्टिकोण
पर्यावरण पेडागाजी नोट्स : पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और इसकी आवश्यकता, पर्यावरणीय शिक्षा का महत्व एवं उद्देश्य
पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और उसकी आवश्यकता - भाग 1
पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा
पर्यावरण शिक्षा अपने आसपास के परिवेश की शिक्षा है। पर्यावरण शब्द दो शब्दों से बना है - परि + आवरण, अर्थात हमारे चारों ओर का आवरण (वातावरण)। मानव का जीवन अपने आसपास के पर्यावरण पर निर्भर है। आज के युग में पर्यावरणीय ह्रास के परिणामस्वरूप जीवन के आधार, प्राकृतिक स्त्रोत संकट में हैं। इस प्रकार पृथ्वी पर जीव तथा उत्पादक दोनों का अस्तित्व संकट में है। पर्यावरण शिक्षा एक ऐसा उपाय है, जिससे मानव पृथ्वी पर जीवित रहने के अवसरों की निरन्तरता बनाये रख सकता है। पर्यावरण की चिन्ता तथा चिन्तन में छात्रों को जागरूक करना आवश्यक है।
→ पर्यावरण शिक्षा वास्तव में पर्यावरण की मूल अवधारणाओं को जानने, समझने तथा व्यवहार में अपनाने की प्रक्रिया है। इसमें पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति सकारात्मक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
सेम्पल के अनुसार - "मानव पृथ्वी तल की उपज है।"
अनास्टैसी के अनुसार - "व्यक्ति के वंशानुक्रम के अतिरिक्त वह सबकुछ पर्यावरण है जो उसे प्रभावित करता है।"
पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता
पृथ्वी का प्रत्येक देश-प्रदेश किसी न किसी प्रकार के पर्यावरण संकट से जूझ रहा है। सभी विकासशील एवं विकसित देश जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभावों, प्रदूषण, विकास से छेड़छाड़ से उत्पन्न विकृतियों, असंतुलन का सामना कर रहे हैं। मानव द्वारा औद्योगीकरण की तेज रफ्तार से पर्यावरण असंतुलन तथा प्रदूषण संकट के साथ तीव्रता से रिक्त होते ऊर्जा भंडार, भूजलस्तर, पृथ्वी तल का बढ़ता तापमान, अपशिष्ट कचरे का भंडार आदि विकराल समस्या बनते जा रहे हैं। जल, वायु जीवन के भौतिक आधार हैं, इनमें बढ़ते प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता में निरंतर कमी आ रही है।
→ उपर्युक्त पर्यावरणीय संकट, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, जनसंख्या विस्फोट से घटती जीवन की गुणवत्ता आदि सभी समस्याओं का समाधान किसी नियम अधिनियम से संभव नहीं है। पर्यावरणीय समस्या के समाधान में सकारात्मक चिन्तन तथा सकारात्मक व्यवहार ही एकमात्र विकल्प है जो जागरूकता, जानना, समझना, दृष्टिकोण में परिवर्तन तथा व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन से संभव है। इस प्रक्रिया का प्रथम चरण जागरूकता है। पर्यावरण के विभिन्न घटकों को जानना, समझना तथा संरक्षण के प्रति सकारात्मक व्यवहार करने का प्रयास ही पर्यावरण शिक्षा है।
→ पर्यावरण प्राथमिक स्तर पर जानकारी तथा ज्ञान देने का सशक्त माध्यम भी है, इससे बच्चे अपने जाने-पहचाने पर्यावरण के माध्यम से सरलता, सहजता से सीखते हैं तथा प्रकृति के साथ उसका भावनात्मक लगाव भी हो सकता है। यह बच्चे के भविष्य में प्रकृति के विनाश के प्रति सचेत अवश्य रहेंगे।
→ प्रारंभिक शिक्षा काल वास्तव में बच्चों का समग्र विकास का काल होता है अतः इस काल में बच्चा जो प्राथमिक स्तर पर सीखता है वह अपने जीवन पर्यंत तक याद रखता है।
→ माध्यमिक स्तर पर पर्यावरणीय शिक्षा बच्चों को अपने प्राकृतिक, जैविक तथा सामाजिक परिवेश से जोड़ती है। गुणवत्तापूर्वक जीवन के लिए प्रकृति का प्रत्येक घटक अनिवार्य है तथा परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर है। इसकी सीख बच्चे इस स्तर पर प्राप्त करते हैं।
→ उच्चतर स्तर के छात्रों में प्रकृति संरक्षण की समझ को तथा संरक्षण हेतु सक्रीय प्रयास को प्रेरित करने का प्रयास करना आवश्यक होता है।
→ पर्यावरण शिक्षा विश्व समुदाय को पर्यावरणीय संबंधी दी जाने वाली वह शिक्षा है जिससे वे समस्याओं से अवगत होकर उनका हल खोज सकें तथा भविष्य में आने वाली समस्याओं को रोक सकें।
पर्यावरणीय शिक्षा का महत्व
हमारे जीवन व पर्यावरण का घनिष्ठ संबंध है। पर्यावरण के विभिन्न घटक मनुष्य के सुव्यवस्थित जीवन का आधार है, अतः पर्यावरण शिक्षा के द्वारा ही मानव अपनी संस्कृति, जैव, भौतिक प्रकृति के मध्य में अपनी प्रतिबद्धता को पहचानने, समझने के लिए आवश्यक कौशल, अभिवृत्ति का विकास कर सकता है -
(1) पर्यावरणीय घटकों का हमारे जीवन में महत्व स्पष्ट कर परस्पर निर्भरता की समझ को प्रेरित करती है।
(2) प्राकृतिक स्त्रोतों, उनके संतुलन, उपलब्धता, जीवन हेतु अनिवार्यता की समझ प्राप्त होती है।
(3) प्रकृति में वृक्षों का महत्व, वृक्षारोपम, संरक्षण, चारागाह की जानकारी प्राप्त होती है।
(4) पर्यावरणीय शिक्षा छात्रों में समुदाय के हित, सहयोग, परस्पर निर्भर्रता, टीम वर्क, सहकारिता, सहिष्णुता के मूल्य तथा संरक्षण कार्य में सहयोग से उत्तरदायित्व पूर्ण प्रतिबद्धता का विकास करती है।
(5) पर्यावरण असंतुलन, प्रदूषण, संरक्षण की समस्या के संभावित प्रयासों के चिन्तन से समस्या समाधान करने की योग्यता के विकास में सहायक है।
(6) पर्यावरणीय शिक्षा में सीखना स्वीकारना अधिक महत्वपूर्ण होने से बच्चे को स्व-आकलन करने के स्व-अवसर के अधिक अवसर प्राप्त होने से अनेक कौशलों का विकास होता है।
पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्य
छात्रों को पर्यावरण विषय पढ़ाने के निम्नलिखित उद्देश्य हैं -
(1) पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता का विकास करना।
(2) पर्यावरण के घटक, प्रकृति चक्र, प्राकृतिक संसाधन, प्रदूषण, संरक्षण संबंधी ज्ञान उपलब्ध कराना।
(3) छात्रों में अवलोकन, भाषा प्रयोग, प्रयोग, सारणीयन, संग्रास, एकत्रीकरण, चित्रण, सामाजिक समितियों का ज्ञान, समूह में काम करना, चित्रांकन करने के कौशलों का विकास करना।
(4) पर्यावरणीय प्रयास, उपाय, गतिविधियों, अवधारणाओं के संदर्भ में मूल्यांकन करने की योग्यता का विकास करना।
(5) सहभागिता - पर्यावरण सभी के लिए साझे का है, जब जीवन के आधार (संयुक्त) दोनों का संरक्षण के प्रयास की सम्मिलित होना आवश्यक है, अतः छात्रों में सहयोग सहभागिता के विकास देने वाले प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करना।
(6) पर्यावरणीय (स्थानीय) समस्या के प्रति जानना, समझना तथा संरक्षण हेतु प्रेरित करना।
(7) शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या तथा प्राकृतिक स्त्रोतों की कमी के प्रभाव को जानना, समझना, सक्रिय चिन्तन व व्यवहार करने के लिए प्रेरित करना।
(8) राष्ट्रीय धरोहर, वन सम्पदा, जैव विविधता को जानना समझना तथा प्रकृति से लगाव रखने की अभिवृत्ति को विकसित करना।
(9) पशुपालन, ऊर्जा संग्रह, जल अपव्यय के प्रति जागरूकता विकसित करना।
महत्वपूर्ण बिन्दु
पर्यावरण शिक्षा जीवन आधार की शिक्षा है अतः शिक्षण प्रक्रिया में छात्र को पर्यावरणीय अवधारणाओं को सरल, सहज, स्वअनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करना अधिक महत्वपूर्ण है। प्रत्येक स्तर के छात्रों में दक्षताओं के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय अवधारणाओं का स्पष्ट ज्ञान, दृष्टिकोण, व्यवहार में परिवर्तन (सकारात्मक) लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अतः शिक्षण प्रक्रिया में सीखने को प्रेरित करने वाले अवसरों को प्रधानता होना चाहिए।
पर्यावरण शिक्षा के प्रकार
(A) कक्षा के बाहर - (i) सर्वेक्षण (ii) परियोजना (iii) क्षेत्र भ्रमण (B) कक्षा के अन्दर - (i) खेल (ii) भूमिका अभिनय (iii) अन्य पर्यावरण गतिविधियाँ - (क) परिचर्चा (ख) समस्या हल (ग) केस स्टडी (घ) मुद्दा विशेष विश्लेषण (ड़) चर्चा कला (च) अभिनय (छ) हस्त कला
पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और उसकी आवश्यकता - भाग 2
1. एनसीएफ (NCF 2005) और एनईपी (NEP 2020) के परिप्रेक्ष्य में
→ एकीकृत दृष्टिकोण: NCF 2005 के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 3-5) पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) को अलग-अलग विषयों (विज्ञान, सामाजिक अध्ययन) के रूप में न पढ़ाकर एक 'एकीकृत' विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चे द्वारा अपने परिवेश को एक समग्र इकाई के रूप में देखना है।
→ NEP 2020 का जोर: नई शिक्षा नीति अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) पर बल देती है। पर्यावरण अध्ययन का लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करना है।
2. ऐतिहासिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
→ वैश्विक स्तर: 1972 का 'स्टॉकहोम सम्मेलन' पर्यावरण शिक्षा की आधारशिला माना जाता है। इसके बाद 1992 का 'रियो पृथ्वी सम्मेलन' ने सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाई, जिससे पर्यावरण शिक्षा की अनिवार्यता बढ़ी।
→ भारतीय परिप्रेक्ष्य: भारत में 1977 में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य शिक्षा का अंग बनाया गया। धीरे-धीरे इसे पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बना दिया गया ताकि आने वाली पीढ़ियाँ संसाधन संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें।
3. रचनावादी दृष्टिकोण (Constructivist Approach)
→ पूर्व ज्ञान का उपयोग: पर्यावरण शिक्षा 'रचनावादी' है। शिक्षक बच्चों के स्थानीय अनुभवों और उनके पूर्व ज्ञान को कक्षा की चर्चाओं का आधार बनाते हैं।
→ क्रियात्मक अधिगम: यह माना जाता है कि बच्चा तब बेहतर सीखता है जब वह खुद करके देखता है (Learning by doing)। भ्रमण, प्रयोग और प्रोजेक्ट के माध्यम से सीखना ही अनुभव आधारित अधिगम है, जो कि सैद्धांतिक रटने से कहीं अधिक प्रभावी है।
वैकल्पिक प्रश्न
प्रश्न 1. प्रारंभिक स्तर पर पर्यावरणीय शिक्षा का परिणाम क्या है?
(i) प्राकृतिक खनिज संकट में हैं।
(ii) पृथ्वी पर जीव तथा उत्पादक दोनों का अस्तित्व संकट में है।
(iii) कल्याणकारी कदम पर या है।
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 2. पर्यावरण शिक्षा सेक उपाय है जिससे -
(i) मानव प्राणी का जीवित रहने के अवसरों की निरंतरता बनाये रख सकता है।
(ii) महापुरुषों का कल्याण करा सकता है।
(iii) पर्यावरण शिक्षा अनिवार्य है क्योंकि बच्चे छोटे लोगों के बीच संबंध स्थापित करता है।
(iv) लोगों का अस्तित्व संकट से उत्पन्न किया जाता है।
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 3. पर्यावरणीय ह्रास से मानव-व्यक्ति अपने चारों ओर -
(i) अशिक्षित है।
(ii) अक्षित है।
(iii) प्रतिदिन दैहिक गतिविधि है।
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 4. पर्यावरण शिक्षा निम्न में से किसका विकास करती है?
(i) प्रकृति का
(ii) मानव का
(iii) समाज का
(iv) सर्वांगीण प्रक्रिया का
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 5. पर्यावरण शिक्षा किस पर सबसे अधिक जोर देती है?
(i) न्यायवादी समाज पर
(ii) व्यावहारिक ज्ञान पर
(iii) रचनात्मक ज्ञान पर
(iv) आर्थिक ज्ञान पर
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 6. पर्यावरण शिक्षा का ज्ञान आवश्यक है क्योंकि यह वह सत्य है जो -
(i) मानव एवं जीव जंतुओं के संकट में है।
(ii) मानव पर्यावरण के संशोधक है।
(iii) मानव एवं संबंधों के मध्य संबंधों का है।
(iv) मानव एवं वन्यजीवों के बीच संबंधों का है।
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 7. पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख संकारक है -
(i) पाठ्यक्रम
(ii) क्षेत्र
(iii) समाज
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 8. पर्यावरण शिक्षा का द्वितीय संकारक है -
(i) वायुमंडल
(ii) शिक्षण
(iii) जलवायु
(iv) प्रकृति
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 9. प्राकृतिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है -
(i) मानव पर
(ii) पशु-पक्षियों पर
(iii) पेड़-पौधों पर
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 10. पर्यावरण शिक्षा में समझाया जाता है -
(i) सामाजिक पर्यावरण के बारे में
(ii) प्राकृतिक पर्यावरण के बारे में
(iii) आर्थिक पर्यावरण के बारे में
(iv) उपरोक्त सभी के बारे में
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 11. पर्यावरण की चिन्ता तथा चिन्तन में आवश्यक है -
(i) अच्छे अंक प्राप्त करें
(ii) जागरूक करना
(iii) सामाजिक बनाना
(iv) न्यायवादी बनाना
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 12. पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता बच्चों के लिए है क्योंकि -
(i) पर्यावरण प्राथमिक स्तर पर जानकारी देने का सशक्त माध्यम है।
(ii) प्राथमिक स्तर पर बच्चा जो सीखता है उसे जीवनपर्यंत याद रखता है।
(iii) बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना ताकि वे भविष्य में इस पर चिंतन कर रक्षण कर सकें।
(iv) अपने जीवन को सुखमय बनाने हेतु अधिकाधिक उत्पादन कर सकें।
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 13. पर्यावरण असंतुलन का मुख्य कारक हो सकता है -
(i) औद्योगीकरण की तेज रफ्तार
(ii) अपशिष्ट कचरे का भण्डार
(iii) जनसंख्या में तेजी से वृद्धि
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 14. पर्यावरणीय समस्या के समाधान में सकारात्मक चिन्तन तथा सकारात्मक व्यवहार ही एकमात्र विकल्प है जो से संभव है -
(i) लोगों में जागरूकता फैलाने से
(ii) लोगों का दृष्टिकोण बदलने से
(iii) पर्यावरण के विभिन्न घटकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार करने से
(iv) उपरोक्त सभी से
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 15. पर्यावरण शिक्षा प्राथमिक स्तर पर जानकारी तथा ज्ञान देने का सशक्त माध्यम है क्योंकि -
(i) इससे बच्चे अपने जाने-पहचाने पर्यावरण के माध्यम से सरलता, सहजता से सीखते हैं।
(ii) प्रकृति से उसका भावनात्मक लगाव जुड़ जाता है।
(iii) बच्चे भविष्य में प्रकृति के विनाश के प्रति सचेत रहेंगे।
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 16. बच्चों को पर्यावरण शिक्षा देने का उद्देश्य है -
(i) पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता का विकास करना।
(ii) खेती में पैदावार बढ़ाना।
(iii) विभिन्न प्रकार के रोगों की रोकथाम करना।
(iv) मछली पालन का विकास करना।
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 17. पर्यावरण शिक्षा का निम्न में उद्देश्य नहीं है -
(i) पर्यावरण के घटकों का ज्ञान कराना।
(ii) पर्यावरण संरक्षण का ज्ञान कराना।
(iii) सामाजिक संबंधों में मजबूती का ज्ञान कराना।
(iv) प्राकृतिक संसाधनों का ज्ञान कराना।
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 18. अवधारणाओं के संदर्भ में मूल्यांकन करने की योग्यता का विकास करना एक उद्देश्य है -
(i) घटनाओं के संबंध में
(ii) नीतियों के संबंध में
(iii) पर्यावरण के संदर्भ में
(iv) उपरोक्त कोई नहीं
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 19. पर्यावरणीय समस्या है -
(i) केवल वैज्ञानिकों की
(ii) बुद्धिजीवियों की
(iii) समस्त जनता की
(iv) उपरोक्त सभी की
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 20. यदि एक शिक्षक अपनी कक्षा में जल के अपव्यय के बारे में वार्तालाप करता है तो छात्रों में सुधारात्मक प्रक्रिया के अंतर्गत होगा -
(i) वे जल का नाश नहीं करेंगे।
(ii) जल के महत्व को समझ जायेंगे।
(iii) जल प्रदूषण रोकने के प्रयास करेंगे।
(iv) कथन (i) व (ii) सही है।
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 21. पर्यावरण अध्ययन का हिस्सा नहीं है -
(i) राष्ट्रीय धरोहर
(ii) ऊर्जा संग्रह
(iii) जल का अपव्यय
(iv) सैर या विचरण करना
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 22. (वैकल्पिक प्रश्न - पर्यावरण अध्ययन की शिक्षा : जानना और सीखना)
पर्यावरण शिक्षा जीवन को आधार की शिक्षा है, शिक्षण प्रक्रिया में को पर्यावरणीय अवधारणाओं को सिखाना महत्वपूर्ण है -
(i) अनुशासन के साथ
(ii) श्यामपट एवं पाठ्यसामग्री के प्रयोग से
(iii) सरल, सहज, स्वअनुभव से
(iv) अधिक से अधिक गृहकार्य प्रदान करके
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 23. छात्रों को पर्यावरण को शिक्षा दी जाना अनिवार्य है -
(i) केवल कक्षा के अन्दर
(ii) केवल कक्षा के बाहर
(iii) कक्षा के बाहर एवं अन्दर
(iv) केवल परिक्रमण द्वारा
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 24. NCF 2005 के अनुसार प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन को किस रूप में पढ़ाया जाना चाहिए?
(i) विषय-आधारित
(ii) एकीकृत (Integrated)
(iii) केवल सैद्धांतिक
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 25. स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(i) केवल वन संरक्षण
(ii) पर्यावरण शिक्षा को वैश्विक दिशा देना
(iii) युद्ध रोकना
(iv) आर्थिक विकास
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 26. रचनावादी दृष्टिकोण (Constructivist Approach) में शिक्षण का आधार क्या होता है?
(i) शिक्षक का भाषण
(ii) केवल पुस्तक
(iii) बच्चे का पूर्व ज्ञान और अनुभव
(iv) परीक्षा के अंक
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 27. सतत विकास की अवधारणा को वैश्विक पहचान किस सम्मेलन से मिली?
(i) रियो पृथ्वी सम्मेलन (1992)
(ii) पेरिस समझौता
(iii) क्योटो प्रोटोकॉल
(iv) कोई नहीं
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 28. पर्यावरण अध्ययन में 'अनुभवात्मक अधिगम' का क्या अर्थ है?
(i) रटकर याद करना
(ii) घर पर बैठकर पढ़ना
(iii) करके या अनुभव से सीखना
(iv) केवल वीडियो देखना
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 29. NEP 2020 किस प्रकार की शिक्षा पर सर्वाधिक बल देती है?
(i) रटन विद्या
(ii) परीक्षा पद्धति
(iii) अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा
(iv) तकनीकी रटन
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 30. प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(i) वैज्ञानिक परिभाषाएं याद कराना
(ii) परिवेश के साथ जुड़ाव और समझ विकसित करना
(iii) अधिक अंक दिलवाना
(iv) सिर्फ परीक्षा उत्तीर्ण कराना
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 31. पर्यावरण शिक्षा को औपचारिक शिक्षा का अंग बनाने के लिए भारत में किस दशक में महत्वपूर्ण कार्य हुए?
(i) 1960 के दशक में
(ii) 1970 के दशक में
(iii) 1990 के दशक में
(iv) 2010 के दशक में
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 32. एक शिक्षिका अपने छात्रों से स्थानीय तालाब के बारे में चर्चा करती है, यह किस दृष्टिकोण का उदाहरण है?
(i) रचनावादी दृष्टिकोण
(ii) रटन पद्धति
(iii) कठोर अनुशासन
(iv) एकतरफा संवाद
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 33. पर्यावरण शिक्षा के लिए 'समेकित' (Integrated) उपागम का अर्थ है?
(i) अलग-अलग विषयों को मिलाना
(ii) विषयों को बांटना
(iii) केवल भाषा पढ़ाना
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 34. पर्यावरण शिक्षा में 'संवेदनशीलता' का विकास क्यों आवश्यक है?
(i) परीक्षा पास करने के लिए
(ii) प्रकृति संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व के लिए
(iii) सुंदर दिखने के लिए
(iv) पैसे कमाने के लिए
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 35. बच्चों के पूर्व ज्ञान को कक्षा में शामिल करने से क्या लाभ होता है?
(i) शिक्षक को मेहनत नहीं करनी पड़ती
(ii) विषय अधिक प्रासंगिक और रोचक बनता है
(iii) कक्षा शांत रहती है
(iv) पाठ्यक्रम जल्दी खत्म होता है
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 36. पर्यावरण शिक्षण में स्थानीय परिवेश का महत्व है?
(i) बच्चा अपने वातावरण से जुड़कर बेहतर सीखता है
(ii) यह सस्ता है
(iii) इससे पाठ्यक्रम छोटा होता है
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 37. सतत विकास का क्या अर्थ है?
(i) भविष्य की चिंता किए बिना उपभोग करना
(ii) वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की सुरक्षा
(iii) केवल उद्योग लगाना
(iv) प्रकृति का दोहन करना
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 38. पर्यावरण शिक्षा का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
(i) पर्यावरण को जानना
(ii) पर्यावरण को समझना
(iii) पर्यावरण के प्रति सकारात्मक व्यवहार करना
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 39. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान को एक साथ जोड़ने वाली कड़ी है?
(i) गणित
(ii) पर्यावरण अध्ययन
(iii) इतिहास
(iv) व्याकरण
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 40. निम्न में से कौन सा अधिगम पर्यावरण के लिए श्रेष्ठ है?
(i) रटकर सीखना
(ii) क्रियात्मक/प्रोजेक्ट द्वारा सीखना
(iii) केवल पढ़कर
(iv) सुनकर
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 41. पर्यावरण शिक्षा का दायरा कैसा है?
(i) संकुचित
(ii) केवल किताबी
(iii) व्यापक और जीवनपर्यंत
(iv) केवल स्कूल तक
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 42. पर्यावरण का अर्थ केवल 'पेड़-पौधे' नहीं, बल्कि क्या है?
(i) मानव और समाज
(ii) जीव-जंतु और जल
(iii) भौतिक और जैविक परिवेश का संपूर्ण योग
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 43. बच्चों में तार्किक सोच विकसित करने का माध्यम है?
(i) पर्यावरण अध्ययन
(ii) खेलकूद
(iii) ड्राइंग
(iv) ये सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 44. रियो पृथ्वी सम्मेलन (1992) का मुख्य केंद्र था?
(i) पर्यावरण और विकास
(ii) केवल व्यापार
(iii) अंतरिक्ष खोज
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 45. पर्यावरण शिक्षा में शिक्षक की भूमिका कैसी होनी चाहिए?
(i) एक तानाशाह की
(ii) केवल सूचना देने वाले की
(iii) एक सुविधा प्रदाता (Facilitator) की
(iv) निष्क्रिय
(सही विकल्प: iii)
प्रश्न 46. पर्यावरण शिक्षा के संदर्भ में 'स्थानीय समस्याओं' का क्या महत्व है?
(i) इनका समाधान बच्चा स्वयं खोज सकता है
(ii) ये सीखने को प्रभावी बनाती हैं
(iii) ये वास्तविक दुनिया से जोड़ती हैं
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 47. पर्यावरण शिक्षा में 'अवलोकन' (Observation) क्यों जरूरी है?
(i) कौशल विकास के लिए
(ii) केवल समय बिताने के लिए
(iii) रटने के लिए
(iv) अंक देने के लिए
(सही विकल्प: i)
प्रश्न 48. क्या पर्यावरण शिक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी है?
(i) हाँ
(ii) नहीं, यह सामुदायिक प्रयास है
(iii) सिर्फ अभिभावकों की
(iv) इनमें से कोई नहीं
(सही विकल्प: ii)
प्रश्न 49. 'एकीकृत पर्यावरण शिक्षा' का आधार स्तंभ क्या है?
(i) विज्ञान
(ii) सामाजिक विज्ञान
(iii) पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
(iv) उपरोक्त सभी
(सही विकल्प: iv)
प्रश्न 50. भविष्य की पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण देने हेतु क्या आवश्यक है?
(i) जागरूकता और संरक्षण का व्यवहार
(ii) अंधाधुंध विकास
(iii) केवल नियम कानून
(iv) वृक्ष काटना
(सही विकल्प: i)
उत्तर शीट
प्रश्न 1: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 2: (i) मानव प्राणी का जीवित रहने के अवसरों की निरंतरता बनाये रख सकता है।
प्रश्न 3: (ii) अक्षित है।
प्रश्न 4: (iv) सर्वांगीण प्रक्रिया का
प्रश्न 5: (ii) व्यावहारिक ज्ञान पर
प्रश्न 6: (i) मानव एवं जीव जंतुओं के संकट में है।
प्रश्न 7: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 8: (ii) शिक्षण
प्रश्न 9: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 10: (iv) उपरोक्त सभी के बारे में
प्रश्न 11: (ii) जागरूक करना
प्रश्न 12: (iii) बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना ताकि वे भविष्य में इस पर चिंतन कर रक्षण कर सकें।
प्रश्न 13: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 14: (iv) उपरोक्त सभी से
प्रश्न 15: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 16: (i) पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता का विकास करना।
प्रश्न 17: (iii) सामाजिक संबंधों में मजबूती का ज्ञान कराना।
प्रश्न 18: (iii) पर्यावरण के संदर्भ में
प्रश्न 19: (iii) समस्त जनता की
प्रश्न 20: (iv) कथन (i) व (ii) सही है।
प्रश्न 21: (iv) सैर या विचरण करना
प्रश्न 22: (iii) सरल, सहज, स्वअनुभव से
प्रश्न 23: (iii) कक्षा के बाहर एवं अन्दर
प्रश्न 24: (ii) एकीकृत (Integrated)
प्रश्न 25: (ii) पर्यावरण शिक्षा को वैश्विक दिशा देना
प्रश्न 26: (iii) बच्चे का पूर्व ज्ञान और अनुभव
प्रश्न 27: (i) रियो पृथ्वी सम्मेलन (1992)
प्रश्न 28: (iii) करके या अनुभव से सीखना
प्रश्न 29: (iii) अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा
प्रश्न 30: (ii) परिवेश के साथ जुड़ाव और समझ विकसित करना
प्रश्न 31: (ii) 1970 के दशक में
प्रश्न 32: (i) रचनावादी दृष्टिकोण
प्रश्न 33: (i) अलग-अलग विषयों को मिलाना
प्रश्न 34: (ii) प्रकृति संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व के लिए
प्रश्न 35: (ii) विषय अधिक प्रासंगिक और रोचक बनता है
प्रश्न 36: (i) बच्चा अपने वातावरण से जुड़कर बेहतर सीखता है
प्रश्न 37: (ii) वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की सुरक्षा
प्रश्न 38: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 39: (ii) पर्यावरण अध्ययन
प्रश्न 40: (ii) क्रियात्मक/प्रोजेक्ट द्वारा सीखना
प्रश्न 41: (iii) व्यापक और जीवनपर्यंत
प्रश्न 42: (iii) भौतिक और जैविक परिवेश का संपूर्ण योग
प्रश्न 43: (iv) ये सभी
प्रश्न 44: (i) पर्यावरण और विकास
प्रश्न 45: (iii) एक सुविधा प्रदाता (Facilitator) की
प्रश्न 46: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 47: (i) कौशल विकास के लिए
प्रश्न 48: (ii) नहीं, यह सामुदायिक प्रयास है
प्रश्न 49: (iv) उपरोक्त सभी
प्रश्न 50: (i) जागरूकता और संरक्षण का व्यवहार
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