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अधिगम और शिक्षाशास्त्र : बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में क्यों और कैसे असफल होते हैं?

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अधिगम और शिक्षाशास्त्र : बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में क्यों और कैसे असफल होते हैं?

बाल विकास की अवस्थाएं, सीखने के तरीके और शाला प्रदर्शन में पिछड़ने के मुख्य कारण

बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं एवं शाला प्रदर्शन में असफलता के कारण

बालक किस प्रकार सोचते हैं और कैसे सीखते हैं, इसे गहराई से समझने के लिए हमें उनके बौद्धिक विकास की विभिन्न अवस्थाओं को समझना आवश्यक होता है। जीन पियाजे के अनुसार बौद्धिक विकास की अवस्थाएं बालकों के सीखने की दिशा और गति को निर्धारित करती हैं।

बौद्धिक विकास की प्रमुख अवस्थाएं

1. संवेदी प्रेरक अवस्था (जन्म से 2 वर्ष): बौद्धिक विकास के संदर्भ में जन्म से लेकर दो वर्ष की आयु तक की अवधि को संवेदी प्रेरक अवस्था कहा जाता है। इस अवधि में बच्चा संवेदनाओं और शारीरिक क्रियाओं के सहारे अपने संसार की रचना करता है। इसी अवस्था से भाषा और विचार प्रक्रिया की नींव धीरे-धीरे पड़ने लगती है।

2. प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था (2 से 8 वर्ष): इस अवस्था में पहुंचकर बालक संवेदना प्रेरक के आधार पर किए गए कार्यों को वैचारिक जामा पहनाने की कोशिश करता है। संवेदनात्मक अनुभव तथा प्रत्यक्ष ज्ञान उसकी सोच को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। इस अवस्था में वस्तुओं से छेड़छाड़ करने का अवसर मिलने पर बालक विभिन्न वस्तुओं या एक जैसी दिखने वाली वस्तुओं के बीच अंतर पहचानना सीखता है।

3. ठोस क्रियात्मक अवस्था (8 से 12 वर्ष): इस अवस्था को मूर्त संक्रियात्मक अवस्था भी कहा जाता है। इसमें बालक तर्कपूर्ण ढंग से वास्तविक जगत के बारे में सोचना प्रारंभ कर देता है। वह ठोस और मूर्त स्थितियों से बहुत गहरे स्तर पर जुड़ा रहता है, हालांकि एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति के सामान्यीकरण में अभी भी उसे कठिनाई होती है।

4. औपचारिक क्रियात्मक अवस्था (12 से 16 वर्ष): इस अवस्था को अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था भी कहते हैं। इसमें बालक क्रमशः तर्कशील ढंग से सोचने के योग्य हो जाता है तथा किसी विशेष समस्या का समाधान अनुमान के सहारे खोज सकता है। वह स्थितियों और संख्या संक्रियाओं की परिकल्पना कर सकता है।

बालकों के सीखने के ढंग और विभिन्न गतिविधियाँ

विभिन्न अवस्थाओं में बालक के सोचने व सीखने के ढंग में एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाने पर एकाएक कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है। विकास का क्रम सभी बालकों के लिए समान होता है, भले ही प्रत्येक बालक में परिवर्तन का तरीका पूरी तरह एक जैसा न हो।
बालक विभिन्न परिस्थितियों में भाग लेकर तथा वास्तविक अनुभवों से सबसे अच्छी तरह सीखते हैं। आरंभिक अवस्थाओं में वे खेलों में संलग्न होकर सीखते हैं। खेल के माध्यम से बालकों में संबंधों को देखने, अंतर करने, वर्गीकरण करने, कार्यकारण संबंधों को पहचानने, परिकल्पना करने तथा उसे स्वीकार अथवा त्यागने की योग्यता का विकास होता है।
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में पहुंचकर बालक वस्तुओं, पदार्थों के साथ छेड़छाड़ करके तथा अवलोकन और बातचीत के सहारे सीखते हैं। इस अवस्था में विभिन्न कौशलों पर अधिकार होने से बालक में आत्मगौरव का भाव उत्पन्न होता है और उसे लगता है कि वह कुछ भी कर सकता है। जैसे-जैसे योग्यता विकसित होती है, वह सरल बातों को जानने के बाद अधिक जटिल बातों को जानने की ओर प्रयासरत रहता है।

शाला प्रदर्शन में असफलता के प्रमुख कारण

प्रायः यह देखा जाता है कि पर्याप्त योग्यता होते हुए भी कई बालक शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में पिछड़ जाते हैं, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- उचित वातावरण का निर्माण न होना: स्वच्छंद, स्वतंत्र व निर्भीक वातावरण का अभाव।
- इच्छाओं की पूर्ति न होना: बालक की भावनाओं व इच्छाओं की उचित पूर्ति न होना।
- शिक्षक का व्यवहार एवं व्यक्तित्व: शिक्षक का दृष्टिकोण और आचरण।
- सहपाहियों की संगति: सहपाठियों की गलत संगति का प्रभाव।
- परिस्थितियों का अभाव: बालकों में परस्पर होड़ लगी होना तथा वैयक्तिक विकास हेतु प्रोत्साहन न मिलना, प्रत्येक बालक का असुरक्षित अनुभव करना तथा निःसंकोच भयमुक्त बात रखने के माहौल का अभाव।
- अन्वेषण प्रक्रिया की समझ का अभाव: बालकों में अन्वेषक के विभिन्न माध्यमों जैसे प्रश्न पूछना, प्रयोग करना, दूसरों से बातचीत करना, अवलोकन करना, संबंधित साहित्य पढ़ना आदि के प्रयोग का प्रोत्साहन न मिल पाना।
- प्रस्तुतीकरण का अभाव: बालकों को अपनी जिज्ञासाओं, निष्कर्षों और बातचीत को उचित रूप में सजाकर प्रस्तुत करने हेतु प्रोत्साहन न मिल पाना।

यदि शाला स्तर पर शिक्षक और प्रधानपाठक मिलकर इन बातों की भरपाई न करें, तो निश्चित ही बच्चे शाला प्रदर्शन में अपने-आप को आगे नहीं ले जा सकेंगे और उनके हाथ असफलता ही लगेगी। इसके अलावा बालक की आयु के अनुसार उसे सीखने के उचित अवसर उपलब्ध न कराए जाएं, तो बालक निश्चित ही पिछड़ जाएगा एवं उसकी प्रतिभा संकुचित होकर दम तोड़ देगी। इस हेतु शिक्षक एवं पालक दोनों को मिलकर बालक की प्रतिभा को उजागर करने हेतु प्रयास करना चाहिए।

चुनिंदा 30 वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1. बौद्धिक विकास के संदर्भ में जन्म से लेकर 2 वर्ष तक की आयु को किस अवस्था के नाम से जाना जाता है?
(A) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(B) संवेदी प्रेरक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था

प्रश्न 2. संवेदी प्रेरक अवस्था की समयावधि कितनी होती है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष

प्रश्न 3. प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था की आयु सीमा क्या है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष

प्रश्न 4. ठोस क्रियात्मक अवस्था (मूर्त संक्रियात्मक अवस्था) की समयावधि कितनी है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष

प्रश्न 5. औपचारिक क्रियात्मक अवस्था की आयु सीमा क्या है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष

प्रश्न 6. संवेदी प्रेरक अवस्था में बच्चा किसके सहारे अपना संसार रचाता है?
(A) अमूर्त कल्पनाओं
(B) संवेदनाओं और शारीरिक क्रियाओं
(C) लिखित पुस्तकों
(D) औपचारिक कक्षाओं

प्रश्न 7. भाषा और विचार प्रक्रिया की नींव किस अवस्था में धीरे-धीरे पड़ने लगती है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(C) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
(D) किशोरावस्था

प्रश्न 8. प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था में बालक कार्यों को क्या जामा पहनाने की कोशिश करता है?
(A) व्यावहारिक जामा
(B) वैचारिक जामा
(C) काल्पनिक जामा
(D) तार्किक जामा

प्रश्न 9. किस अवस्था में बालक की सोच को संवेदनात्मक अनुभव तथा प्रत्यक्ष ज्ञान सबसे अधिक प्रभावित करते हैं?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था

प्रश्न 10. किस अवस्था से बालक सहज विचारों को ग्रहण करना प्रारंभ करता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था

प्रश्न 11. ठोस क्रियात्मक अवस्था को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
(A) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(B) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(C) सेंसरी मीटर अवस्था
(D) प्रारंभिक अवस्था

प्रश्न 12. औपचारिक क्रियात्मक अवस्था का अन्य नाम क्या है?
(A) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(B) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(C) संवेदी प्रेरक अवस्था
(D) प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था

प्रश्न 13. एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाने पर बालक में क्या होता है?
(A) एकाएक बहुत बड़ा बदलाव आता है
(B) झटके से कोई बदलाव नहीं आता है
(C) सीखना पूरी तरह रुक जाता है
(D) विकास की गति शून्य हो जाती है

प्रश्न 14. बालक सबसे अच्छी तरह कैसे सीखते हैं?
(A) केवल रटने से
(B) विभिन्न परिस्थितियों में भाग लेकर तथा वास्तविक अनुभवों से
(C) केवल सुनने से
(D) चुपचाप बैठने से

प्रश्न 15. आरंभिक अवस्थाओं में बालक किसके माध्यम से सीखता है?
(A) खेलों में संलग्न होकर
(B) बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर
(C) व्याख्यान सुनकर
(D) प्रयोगशाला में प्रयोग करके

प्रश्न 16. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में पहुंचकर बालक कैसे सीखता है?
(A) वस्तुओं व पदार्थों के साथ छेड़छाड़, अवलोकन तथा बातचीत के सहारे
(B) केवल सोकर
(C) बिना किसी गतिविधि के
(D) केवल टीवी देखकर

प्रश्न 17. किसी कौशल के स्थापत्य से बालक में किस प्रकार का भाव उत्पन्न होता है?
(A) हीन भावना
(B) आत्मगौरव का भाव
(C) उदासीनता
(D) भय का भाव

प्रश्न 18. योग्यता के विकास के साथ बालक सरल बातों को जानने के बाद किसकी ओर प्रयासरत रहता है?
(A) और अधिक सरल बातों को जानने की ओर
(B) अधिक जटिल बातों को जानने की ओर
(C) पढ़ाई छोड़ने की ओर
(D) केवल खेलने की ओर

प्रश्न 19. शाला प्रदर्शन में असफलता का एक प्रमुख कारण क्या है?
(A) स्वच्छंद, स्वतंत्र व निर्भीक वातावरण का अभाव
(B) बहुत अधिक खेलकूद का अवसर मिलना
(C) अत्यधिक गृहकार्य मिलना
(D) अत्यधिक पुरस्कार मिलना

प्रश्न 20. बालकों के शाला प्रदर्शन में पिछड़ने का मुख्य कारण क्या है?
(A) बालक की भावनाओं व इच्छाओं की पूर्ति न होना
(B) बालक की सभी इच्छाओं का तुरंत पूरा होना
(C) शिक्षक का बहुत अधिक स्नेह होना
(D) सहपाठियों का सहयोग होना

प्रश्न 21. शाला प्रदर्शन में असफलता का एक अन्य कारण इनमें से कौन सा है?
(A) शिक्षक का व्यवहार एवं व्यक्तित्व
(B) विद्यालय की सुंदर इमारत
(C) अधिक लंबी छुट्टियां
(D) पाठ्यपुस्तकों का नया होना

प्रश्न 22. बालकों के शाला प्रदर्शन में असफल होने का एक कारण क्या है?
(A) सहपाठियों की गलत संगति
(B) सहपाठियों का योग्य होना
(C) सहपाठियों का गृहकार्य करना
(D) सहपाठियों का खेल में जीतना

प्रश्न 23. बालकों में अन्वेषण प्रक्रिया की समझ पैदा न हो पाने का प्रमुख कारण क्या है?
(A) अन्वेषण के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करने का प्रोत्साहन न मिल पाना
(B) बहुत अधिक प्रयोग करना
(C) लगातार प्रश्न पूछना
(D) साहित्य पढ़ना

प्रश्न 24. शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में असफलता का कारण बालकों की जिज्ञासाओं और निष्कर्षों को किस रूप में प्रस्तुत करने हेतु प्रोत्साहन न मिल पाना है?
(A) उचित रूप में सजाकर प्रस्तुत करने हेतु
(B) बहुत कठिन भाषा में प्रस्तुत करने हेतु
(C) अंग्रेजी में प्रस्तुत करने हेतु
(D) बिना सजाए प्रस्तुत करने हेतु

प्रश्न 25. यदि उपरोक्त बातों की भरपाई शाला स्तर पर कौन मिलकर न करें तो बच्चे शाला प्रदर्शन में आगे नहीं जा सकेंगे?
(A) शिक्षक एवं प्रधानपाठक
(B) केवल चपरासी
(C) केवल बाहरी लोग
(D) केवल व्यापारी

प्रश्न 26. बालक की आयु के अनुसार उसे सीखने के उचित अवसर उपलब्ध न कराये जाएं तो क्या होगा?
(A) बालक की प्रतिभा संकुचित होकर दम तोड़ देगी
(B) बालक अति प्रतिभाशाली हो जाएगा
(C) बालक में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
(D) बालक स्वतः सीख जाएगा

प्रश्न 27. बालक की प्रतिभा को उजागर करने हेतु किन दोनों को मिलकर प्रयास करना चाहिए?
(A) शिक्षक एवं पालक
(B) दुकानदार एवं डॉक्टर
(C) नेता एवं अभिनेता
(D) केवल मित्र

प्रश्न 28. बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सृजन स्वयं करते हैं, यह मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
(A) जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास से
(B) केवल रटने की आदत से
(C) कठोर अनुशासन से
(D) केवल दंड से

प्रश्न 29. कक्षा में सृजनात्मक वातावरण का निर्माण करने के लिए शिक्षक को क्या करना चाहिए?
(A) बच्चों को प्रश्न पूछने और अन्वेषण के अवसर देना
(B) बच्चों को पूरी तरह चुप रखना
(C) केवल ब्लैकबोर्ड पर लिखना
(D) रटने पर जोर देना

प्रश्न 30. यदि कोई बच्चा कक्षा में बार-बार असफल हो रहा है, तो शिक्षक का क्या कर्तव्य होना चाहिए?
(A) बच्चे को डांटना
(B) असफलता के कारणों का पता लगाकर उचित वातावरण व अवसर प्रदान करना
(C) बच्चे को कक्षा से बाहर बैठाना
(D) उस पर ध्यान न देना

उत्तर शीट

प्रश्न 1. उत्तर (B)
प्रश्न 2. उत्तर (A)
प्रश्न 3. उत्तर (B)
प्रश्न 4. उत्तर (C)
प्रश्न 5. उत्तर (D)
प्रश्न 6. उत्तर (B)
प्रश्न 7. उत्तर (A)
प्रश्न 8. उत्तर (B)
प्रश्न 9. उत्तर (B)
प्रश्न 10. उत्तर (B)
प्रश्न 11. उत्तर (B)
प्रश्न 12. उत्तर (B)
प्रश्न 13. उत्तर (B)
प्रश्न 14. उत्तर (B)
प्रश्न 15. उत्तर (A)
प्रश्न 16. उत्तर (A)
प्रश्न 17. उत्तर (B)
प्रश्न 18. उत्तर (B)
प्रश्न 19. उत्तर (A)
प्रश्न 20. उत्तर (A)
प्रश्न 21. उत्तर (A)
प्रश्न 22. उत्तर (A)
प्रश्न 23. उत्तर (A)
प्रश्न 24. उत्तर (A)
प्रश्न 25. उत्तर (A)
प्रश्न 26. उत्तर (A)
प्रश्न 27. उत्तर (A)
प्रश्न 28. उत्तर (A)
प्रश्न 29. उत्तर (A)
प्रश्न 30. उत्तर (B)

लेख का सारांश:
इस लेख में बालकों के बौद्धिक विकास की चार प्रमुख अवस्थाओं, उनके सीखने के तरीकों और शाला प्रदर्शन में असफलता के विभिन्न कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें यह बताया गया है कि उचित वातावरण, प्रेरणा और सीखने के सही अवसर न मिलने पर बच्चों की प्रतिभा कैसे प्रभावित होती है।
विषय क्षेत्र: अधिगम और शिक्षा शास्त्र (बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र)
जानकारी का स्रोत: हस्तलिखित नोट्स एवं शैक्षणिक शिक्षण सामग्री

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
लेखक
(Writer)
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