शैशवावस्था इसका स्वरूप, महत्व एवं विशेषताएँ | बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र
बालक के जन्म के पश्चात 5 वर्ष की अवस्था शैशवकाल होती है। बालक की इस अवस्था को “बालक का निर्माण काल” माना जाता है।
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बालक के जन्म के पश्चात 5 वर्ष की अवस्था शैशवकाल होती है। बालक की इस अवस्था को “बालक का निर्माण काल” माना जाता है।
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इस लेख में चिन्तन व तर्क में अन्तर को सपष्ट करते हुए गणित शिक्षण में तर्क शक्ति का विकास, विकसित करने के उपायों एवं गणित अध्यापन के उद्देश्यों की जानकारी दी गई है।
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इस लेख में शिक्षक चयन परीक्षाओं की तैयारी के लिए व्यक्तित्व मापन इसकी प्रविधियाँ ,अंतर्मुखी एवं बहिर्मुखी व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दी गई है।
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इस लेख में शासकीय सेवक की सेवा काल में मृत्यु के बाद आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन के प्रारूप एवं नियमावली के आदेश के बारे में जानकारी दी गई है।
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इस भाग में वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए हिन्दी कक्षा - 5 के पाठ 1 "पुष्प की अभिलाषा" के अंदर से वस्तुनिष्ठ, रिक्त स्थान पूर्ति, अति लघुत्तरीय, लघुत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं।
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रचना अर्थात बनावट के आधार पर शब्दों के तीन भेद हैं–
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इस भाग में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा 18 जनवरी 2025 के 4 हिन्दी अनुच्छेदों के 20 प्रश्नों की उत्तर शीट दी गई है।
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'किंतु' एवं 'परंतु' दोनों शब्द समानार्थक हैं। इनका प्रयोग वाक्य में किसी कार्य के पूर्ण होने या न होने का कारण बताने के लिए इन शब्दों के बाद आगे की बात कही जाती है।
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पाठ-1 "जिसने सूरज चाँद बनाया", यह कविता कक्षा 1 के पाठ्यक्रम में रखी गई है जिसमें ईश्वर से प्रार्थना की गई है।
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