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मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025 - अध्याय 1: प्रारंभिक (संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, प्रयुक्ति क्षेत्र एवं परिभाषाएँ)


मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025 - अध्याय 1: प्रारंभिक (संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, प्रयुक्ति क्षेत्र एवं परिभाषाएँ)

नए अवकाश नियमों का परिचय, प्रारंभ तिथि, लागू होने का दायरा, अपवाद एवं सभी महत्वपूर्ण परिभाषाएँ - पूर्णतः आधिकारिक गजट PDF पर आधारित

प्रकाशन तिथि: 24 नवम्बर 2025 | प्रभावी तिथि: 01 जनवरी 2026

परिचय

मध्यप्रदेश शासन ने गजट क्रमांक 315, दिनांक 24 नवम्बर 2025 को "मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025" अधिसूचित किया है। ये नियम वर्ष 1977 के पुराने अवकाश नियमों का स्थान लेंगे।

यह लेख अध्याय 1: प्रारंभिक की पूर्ण जानकारी प्रदान करता है, जो पूर्णतः आधिकारिक गजट PDF पर आधारित है।


नियम 1: संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ

(1) संक्षिप्त नाम: इन नियमों का संक्षिप्त नाम "मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025" है।

(2) प्रारंभ: ये नियम दिनांक 01 जनवरी, 2026 से प्रवृत्त होंगे।


नियम 2: प्रयुक्ति का क्षेत्र

ये नियम उन सभी शासकीय सेवकों पर लागू होंगे, जो 01 जनवरी 2026 को सेवा में हैं तथा राज्य की सिविल सेवाओं एवं पदों पर नियुक्त हैं।

किन्तु ये नियम निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे -

(क) आकस्मिक या दैनिक दर पर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त व्यक्ति
(ख) आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले व्यक्ति
(ग) कार्यभारित स्थापना में नियुक्त व्यक्ति
(घ) संविदा पर नियुक्त व्यक्ति (जब तक कि संविदा में अन्यथा उपबंधित न हो)
(ङ) ऐसे व्यक्ति, जिनके लिए संविधान अथवा अन्य नियमों के अधीन विशेष उपबंध बने हैं
(च) केन्द्रीय सरकार अथवा अन्य स्रोत से राज्य सरकार के विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत व्यक्ति
(छ) अखिल भारतीय सेवा के सदस्य


नियम 3: परिभाषाएँ

(क) "सेवा का पूर्ण वर्ष या एक वर्ष की निरंतर सेवा" - मध्यप्रदेश शासन के अधीन निरंतर की गई सेवा। इसमें कार्य पर व्यतीत अवधि, अवकाश तथा असाधारण अवकाश पर बिताई गई अवधि भी सम्मिलित है।

(ख) "सेवानिवृत्ति की तिथि" - उस महीने के अंतिम दिन का अपराह्न, जिसमें शासकीय सेवक सेवानिवृत्ति हेतु निर्धारित आयु पूर्ण करता है। उदाहरण - यदि जन्मदिन 15 मार्च है तो सेवानिवृत्ति तिथि 31 मार्च का अपराह्न होगी।

(ग) "बाह्य सेवा" - शासन की स्वीकृति से राज्य की संचित निधि के अलावा अन्य स्रोत से वेतन प्राप्त करना।

(घ) "प्रपत्र" - इन नियमों के साथ संलग्न प्रपत्र (फॉर्म 1 से 7)।

(ङ) "अकायद दिवस" (Dies-non) - वह दिवस या अवधि जिसमें शासकीय सेवक कर्तव्य से जानबूझकर अनुपस्थित रहा हो तथा उस अवधि हेतु अवकाश स्वीकृत न किया गया हो। यह अवधि सेवा के किसी भी प्रयोजन के लिए मान्य नहीं होगी।

(च) "शासकीय सेवक" - जो राज्य शासन में किसी नियमित स्थापना के पद को धारण करता हो अथवा किसी नियमित स्थापना के पद पर धारणाधिकार रखता हो।

(छ) "अवकाश विभाग" - वह विभाग जिसमें विशिष्ट संवर्ग के शासकीय सेवकों को नियमित विश्रामावकाश की अनुमति दी जाती है।

(ज) "अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम अधिकारी" - वह अधिकारी जिसका उल्लेख प्रथम अनुसूची के कॉलम-3 में किया गया है।


नियम 4: अस्थायी स्थानांतरण या बाह्य सेवा पर

जिन शासकीय सेवकों पर ये नियम लागू होते हैं, वे केन्द्रीय शासन या अन्य राज्य शासन में अस्थायी स्थानांतरण पर अथवा भारत के बाहर बाह्य सेवा पर भी इन्हीं नियमों द्वारा शासित होंगे।

भारत के बाहर UN एजेंसियों या केन्द्रीय सशस्त्र बल में अस्थायी स्थानांतरण पर - वहाँ की शर्तों की सीमा तक ही लागू होंगे।


नियम 5: अन्य अवकाश नियमों से स्थानांतरण

(क) अस्थायी स्थानांतरण पर - पुराने अवकाश नियम लागू रहेंगे।

(ख) नियमित पद पर नियुक्ति पर - नए नियम लागू होंगे। पुराने नियमों के तहत जमा अवकाश को नियम 25 एवं 28 की सीमा तक आगे ले जाया जाएगा।


नियम 6: अवकाश का अधिकार

अवकाश की मांग अधिकार के रूप में नहीं की जा सकेगी।

अवकाश स्वीकृतकर्ता अधिकारी द्वारा अवकाश को अमान्य या निरस्त किया जा सकेगा। सेवानिवृत्ति के पूर्व के 10 वर्षों में सामान्यतः अवकाश देने से इंकार नहीं करना चाहिए।


नियम 7: अवकाश के दावे का नियमन

अवकाश का दावा अवकाश स्वीकृति के समय लागू नियमों तथा अवकाश लेखे में शेष अवकाश से विनियमित होगा।


नियम 8: पदच्युति, निष्कासन या त्यागपत्र पर प्रभाव

(1) पदच्युत, निष्कासित या त्यागपत्र देने पर जमा अवकाश स्वतः समाप्त हो जाएगा।

(2) यदि राज्य शासन के किसी अन्य पद के लिए आवेदन करने हेतु त्यागपत्र दिया जाता है, तो जमा अवकाश समाप्त नहीं होगा।

(3) पुनःस्थापित होने पर पूर्व सेवा के अवकाश की गणना की पात्रता होगी।

(4) पेंशन पर सेवानिवृत्त होकर पुनर्नियुक्त होने पर पूर्व सेवा को अवकाश हेतु गणना में लेने की पात्रता होगी।


नियम 9: एक अवकाश का दूसरे में परिवर्तन

शासकीय सेवक के लिखित निवेदन पर भूतलक्षी प्रभाव से अवकास का प्रकार बदला जा सकता है। आवेदन अवकाश से वापसी के 15 दिन के भीतर प्रस्तुत करना होगा। सेवानिवृत्ति के बाद परिवर्तन संभव नहीं।


नियम 10: विभिन्न अवकाश का संयोजन

विभिन्न प्रकार के अवकाश को संयोजित किया जा सकता है, किन्तु असाधारण अवकाश को किसी अन्य अवकाश के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।


सारांश तालिका: महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द / अभिव्यक्ति    अर्थ
सेवा का पूर्ण वर्ष    म.प्र. शासन के अधीन निरंतर सेवा
सेवानिवृत्ति तिथि    उस महीने का अंतिम दिन जिसमें आयु पूर्ण हो
बाह्य सेवा    संचित निधि के अलावा अन्य स्रोत से वेतन
अकायद दिवस    बिना अनुमति अनुपस्थिति, सेवा में मान्य नहीं
शासकीय सेवक    नियमित स्थापना के पद का धारक
सक्षम अधिकारी    प्रथम अनुसूची कॉलम-3 में उल्लिखित


निष्कर्ष

अध्याय 1 में हमने जाना कि ये नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे, 7 श्रेणियों को छोड़कर सभी पर लागू होंगे। "अकायद दिवस" (Dies-non) को सेवा में नहीं गिना जाएगा। अवकाश अधिकार नहीं है, स्वीकृत करने वाले अधिकारी के विवेक पर निर्भर है।

नोट: यह लेख मध्यप्रदेश शासन के गजट क्रमांक 315, दिनांक 24 नवम्बर 2025 पर आधारित है। नियमों की सटीक व्याख्या हेतु आधिकारिक गजट का संदर्भ लें।


लेख का सारांश:
यह लेख मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025 के अध्याय 1 - प्रारंभिक की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें नियम 1 से 10 तक का विवरण है, जिसमें नियमों का संक्षिप्त नाम, 1 जनवरी 2026 से प्रारंभ, 7 श्रेणियों को छोड़कर सभी पर लागू होना, सभी महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सेवानिवृत्ति तिथि, बाह्य सेवा, अकायद दिवस (Dies-non), सक्षम अधिकारी, अवकाश का अधिकार न होना, तथा एक अवकाश का दूसरे में परिवर्तन आदि शामिल हैं। पूरी जानकारी आधिकारिक गजट PDF पर आधारित है।
विषय क्षेत्र: सरकारी नियम, कर्मचारी सेवा नियम, अवकाश नियम, मध्यप्रदेश शासन, सिविल सेवा, प्रशासनिक सेवाएँ
जानकारी का स्रोत: मध्यप्रदेश शासन का गजट क्रमांक 315, दिनांक 24 नवम्बर 2025 - "मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025"

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
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Thank you.
लेखक
(Writer)
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