Major Straits of the World || विश्व की प्रमुख जलसंधि
जलसंधि (Strait)– पानी का सकरा भाग जो दो बड़ी जल राशि जैसे समुद्रों तथा महासागरों को एक दूसरे से जोड़ती है जलसंधि कहते हैं।
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जलसंधि (Strait)– पानी का सकरा भाग जो दो बड़ी जल राशि जैसे समुद्रों तथा महासागरों को एक दूसरे से जोड़ती है जलसंधि कहते हैं।
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ऋतु परिवर्तन, ग्रहण, सुपरमून और विषुव क्या है ? पृथ्वी का सूर्य के चक्कर लगाने में Earth अलग-अलग स्थितियों में आती है।
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घूर्णन गति (Rotational speed)- इस गति में पृथ्वी अपने अक्ष के सापेक्ष पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर घूमती है। इसके अंतर्गत पृथ्वी लट्टू की भांति घूर्णन करती है। इससे 'परिभ्रमण' या 'दैनिक' गति भी कहा जाता है। Our Earth rotates from west to east at a speed of approximately 1,670 km per hour. Earth completes its rotation in 23 hours, 56 minutes and 4 seconds . For this reason, there are days and nights on the earth. Throughout the year, the days and nights are equal on the equator, because the angular inclination of the equator is always 0 ° relative to the Sun.
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संघनन के विभिन्न रूप- ओस, पाला, कुहरा, धुन्ध, बादल, वर्षा, हिमपात, ओले
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उपग्रह (Satellite) - ये ऐसे अकाशीय पिंड होते हैं, जो अपने ग्रह की परिक्रमा करने के साथ-साथ सूर्य की परिक्रमा भी करते हैं। प्रकृति द्वारा निर्मित उपग्रह 'प्राकृतिक उपग्रह' कहलाते हैं। इनमें अपनी स्वयं की चमक या प्रकाश नहीं होता है। यह भी ग्रहों की भांति सूर्य या तारों के प्रकाश से ही प्रकाशित होते हैं। हमारे सौरमंडल में सबसे अधिक उपग्रह वाला ग्रह बृहस्पति है। बुध एवं शुक्र ऐसे ग्रह हैं, जिनका कोई भी उपग्रह नहीं है। हमारी पृथ्वी का भी एक प्राकृतिक उपग्रह 'चंद्रमा' है।
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निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर पर्वतों को चार भागों में बाँटा जा सकता है -
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Types of Rain- Sustainable Rain, Mountain Rain, Cyclonic Rain
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वर्तमान में सौरमंडल में कुल 8 ग्रह हैं। इन्हें दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है -
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सूर्य, पृथ्वी के समान ग्रहों, विभिन्न उपग्रहों एवं अन्य खगोलीय पिंडों का परिवार 'सौरमंडल' कहलाता है। सौरमंडल का प्रमुख सदस्य 'सूर्य' एक 'तारा' है। इसके चारों और आठ ग्रह चक्कर लगाते हैं। ये ग्रह क्रमशः बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण तथा वरुण हैं। ये ग्रह परवलयाकार मार्ग में सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। सौरमंडल की संपूर्ण ऊर्जा का स्रोत सूर्य है।
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ब्रह्मांड में उपस्थित गैसों एवं धूल के कणों अथवा बादलों में गुरुत्वाकर्षण होता है। इस कारण से आकाशगंगा के केंद्र में नाभिकीय संलयन प्रारंभ हो जाता है। इससे हाइड्रोजन, हीलियम में परिवर्तित होने की वजह से नवीन तारे निर्मित होते हैं। इन्हीं बादलों को 'स्टेलर नर्सरी' कहते हैं। आकाशगंगा में हाइड्रोजन का बादल बहुत बड़ा होता है। इससे गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से गैसीय पिंड सिकुड़ने लगता है। यह तारे के जन्म का प्रारंभिक रूप होता है। इसे 'आदि तारा' कहा जाता है।
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