भूगोल (Geography) Category Blogs
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भारत का भूगोल : गंगा नदी का अपवाह तंत्र<br> Geography of India : Drainage System of Gangetic River thumbnail
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भारत का भूगोल : गंगा नदी का अपवाह तंत्र
Geography of India : Drainage System of Gangetic River

अलकनंदा नदी और भागीरथी नदी देवप्रयाग में मिलने के पश्चात संयुक्त रुप से 'गंगा नदी' कही जाती है। अलकनंदा नदी का उद्गम सतोपथ हिमानी से हुआ है तथा भागीरथी नदी का उद्गम 'गोमुख' के निकट 'गंगोत्री हिमनद' से हुआ है। गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ - कोसी, गंडक, बाघमती, महानंदा, घाघरा, गोमती रामगंगा, यमुना, सोन, कर्मनाशा, टोंस हैं। अलकनंदा की सहायक नदियाँ पिंडार, रुद्रप्रयाग, धौली गंगा, विष्णु गंगा हैं। गंगा नदी के तट पर 'बद्रीनाथ' का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल : सिंधु नदी का अपवाह तंत्र<br> Geography of India : Drainage System of Indus River thumbnail
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भारत का भूगोल : सिंधु नदी का अपवाह तंत्र
Geography of India : Drainage System of Indus River

सिंधु नदी: का उद्गम कैलाश पर्वत में वह 'बोखर चू' के पास एक हिमनद से हुआ है। इस नदी को तिब्बत में 'शेर मुख' या 'सिंगी खंबान' के नाम से जाना जाता है। सिंधु नदी उद्गम के बाद लद्दाख तथा जास्कर श्रेणियों के मध्य से प्रवाहित होकर 'दमचोक' के पास से भारत में प्रवेश करती है। यह लद्दाख तथा गिलगित से प्रवाहित होने के दौरान गार्ज का निर्माण करती है। इसके बाद यह दर्दिस्तान में चिल्लड़ के निकट पाकिस्तान में प्रवेश करती है। सिंधु नदी की लंबाई 28,80 किलोमीटर है। इसमें से भारत में सिंधु की कुल लंबाई 11,14 किलोमीटर है। सिंधु नदी की अनेक सहायक नदियाँ हैं। उदाहरण - गिलगित, श्योक, काबुल, शिगार, पंचनद, जास्कर इत्यादि। पंचनद के अंतर्गत पाँच नदियाँ आती हैं ये नदियाँ हैं - झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलुज। इसकी अन्य सहायक नदियाँ - कुर्रम, तोची, गोमल, संगर और विबोआ है। ये सभी नदियाँ सुलेमान पर्वत से निकलती है। पंचनद नदियाँ आपस में मिलकर पाकिस्तान में 'मीथनकोट' के पास सिंधु नदी से मिलती हैं। सिंधु नदी का मुहाना अरब सागर में है। यह नदी भारत में केवल लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र से प्रवाहित होती है। इस नदी के दाएँ तट पर भारत का लेह स्थित है। सिंधु नदी जल समझौते के अनुसार भारत विसर्जन क्षमता का केवल 20% भाग ही उपयोग कर सकता है। यह समझौता विभाजन के पश्चात सन् 1960 में हुआ था।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल : भारत के तटीय मैदान<br> Geography of India : Coastal Plains of India thumbnail
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भारत का भूगोल : भारत के तटीय मैदान
Geography of India : Coastal Plains of India

भारत के तटीय मैदान का विस्तार प्रायद्वीपीय पर्वत श्रेणी तथा समुद्र तट के बीच में हुआ है। इन मैदानों का निर्माण 'सागर की तरंगों' द्वारा अपरदन तथा निक्षेपण और पठारी नदियों द्वारा लाए गए अवसादो के जमाव के कारण हुआ है। ये तटीय मैदान पूर्वी एवं पश्चिमी दोनों घाटों की और फैले हुए हैं।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल ~ प्रायद्वीपीय पठार (Geography of india ~ Peninsular Plateau) thumbnail
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भारत का भूगोल ~ प्रायद्वीपीय पठार (Geography of india ~ Peninsular Plateau)

भारतीय प्रायद्वीपीय पठार की आकृति 'अनियमित त्रिभुजाकार' है। इस पठार का विस्तार उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वत श्रेणी तथा दिल्ली, पूर्व में राजमहल की पहाड़ियों, पश्चिम की ओर गिर पहाड़ियों, दक्षिण दिशा में इलायची (कार्डमम) पहाड़ियों तथा पूर्वोत्तर में शिलांग तथा कार्बी-ऐंगलोंग के पठार तक है। इस पठार की ऊंचाई 6,00 से 9,00 मीटर है। यह प्रायद्वीपीय पठार 'गोंडवाना लैंड' के टूटकर उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होने के कारण बना था। यह प्राचीनतम भूभाग 'पैंजिया' का ही एक हिस्सा है। यह पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय एवं रूपांतरित शैलों से बना हुआ है। प्रायद्वीपीय पठार की ऊंचाई पश्चिम से पूर्व की ओर कम होती जाती है। इस वजह से प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश नदियों का प्रवाह पूर्व की ओर ही है। प्रायद्वीपीय पठार का ढाल उत्तर से पूर्व दिशा की ओर है। यह सोन, चंबल और दामोदर नदियों के प्रवाह से स्पष्ट हो जाता है। दक्षिणी भाग में पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर है, जोकि कृष्णा, महानदी, गोदावरी और कावेरी नदियों के प्रवाह से स्पष्ट हो जाता है। प्रायद्वीपीय नदियों में 2 नदियों के अपवाह हैं। ये नदियाँ हैं- नर्मदा एवं ताप्ती। इनके बहने की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर है। तथा ये अंत में अरब सागर में गिरती हैं। ऐसा 'भ्रंश घाटी' से होकर बहने के कारण है। प्रायद्वीपीय पठार अनेक पठारों से मिलकर बना हुआ है, अतः इसे 'पठारों का पठार' भी कहते हैं। इसे हम चार भागों में वर्गीकृत कर सकते हैं :

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल : भारतीय मरूस्थल Geography of India:   Indian Desert thumbnail
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भारत का भूगोल : भारतीय मरूस्थल Geography of India: Indian Desert

मरुस्थल ऐसा क्षेत्र होता है, जहाँ वार्षिक वर्षा 25 सेंटीमीटर या उससे भी कम मात्रा में होती है। यह मरुस्थलीय क्षेत्र हमारे 'भारत' में भी स्थित है। यह मरुस्थल भारत में अरावली पर्वतों के उत्तर-पश्चिम तथा पश्चिमी किनारों पर 'बालू के टिब्बों' से ढका हुआ है। इसे हम 'थार का मरुस्थल' के नाम से जानते हैं। यह एक तरंगित मरुस्थलीय मैदान है। थार के मरुस्थल का अधिकांश भाग 'राजस्थान' में स्थित है। इसके अलावा कुछ भाग गुजरात, हरियाणा तथा पंजाब में भी है। विश्व के समस्त मरुस्थलीय क्षेत्र में सर्वाधिक जन घनत्व हमारे थार के मरुस्थल में ही है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल : उत्तर भारत का विशाल मैदान Geography of India : Great Plain of Northern India

उत्तरी भारत के विशाल मैदान को 'गंगा, ब्रह्मपुत्र नदियों का मैदान' भी कहा जाता है। क्योंकि इस विशाल मैदान का निर्माण मुख्यतः सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादो के निक्षेपण के द्वारा हुआ है। यह मैदान पश्चिम दिशा में 'सिंधु नदी' से लेकर पूर्व दिशा में 'ब्रह्मपुत्र नदी' तक विस्तृत है। यह विशाल मैदान समतल है और इसके उच्चावच में अंतर बहुत कम है। यह मैदान पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3,200 किलोमीटर लंबा है। इस मैदान की चौड़ाई लगभग 1,50 से 3,00 किलोमीटर है। यह मैदान समुद्र तल से लगभग 50 से 1,50 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मैदान कृषि कार्य के लिए बहुत उपयुक्त है। क्योंकि यहां की मिट्टी उपजाऊ है तथा यहां पर उपयुक्त जलवायु है एवं पर्याप्त जलापूर्ति होती है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भौगोलिक खण्ड - महान हिमालय<br> Geographical Segment of India - Great Himalaya thumbnail
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भारत का भौगोलिक खण्ड - महान हिमालय
Geographical Segment of India - Great Himalaya

'हिमालय' भारतीय भू-आकृतिक संरचना का एक अभिन्न अंग है। यह उत्तर-पश्चिम में जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। इसकी लंबाई लगभग 2,500 किलोमीटर है। इसकी रचना 'टर्टियरी काल' के 'अल्पाइन भूसंचलन' के कारण हुई है। हिमालय पश्चिम में 400 किलोमीटर चौड़ा एवं पूर्व में 160 किलोमीटर चौड़ा है। यह पश्चिम में पूर्व की अपेक्षा अधिक चौड़ा है। इसका प्रमुख कारण अभिसारी सीमांत पर दबाव बल का अधिक होना है। पूर्व में दबाव बल अधिक होने के कारण पूर्व में स्थित पर्वतीय क्षेत्र पश्चिम की अपेक्षा अधिक ऊंचे हैं। इसी कारण 'माउंट एवरेस्ट' तथा 'कंचनजंगा' जैसी ऊंची पर्वत चोटियां पूर्वी हिमालय में स्थित है हिमालय पर्वत श्रेणियां भारत की ओर उत्तल तथा तिब्बत की और अवतल है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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भारत का भूगोल– सामान्य जानकारी Geography of India - General Information thumbnail
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भारत का भूगोल– सामान्य जानकारी Geography of India - General Information

नामकरण : हमारे देश भारत का नाम दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र 'भरत' के नाम पर रखा गया था। वे ऋग्वैदिक काल के प्रमुख जन थे। उनका उल्लेख वायु पुराण में मिलता है। भारत को 'आर्यावर्त' के नाम से भी जाना जाता है। इसे यह नाम इसीलिए प्राप्त हुआ क्योंकि यह प्राचीन काल में 'आर्यों' का निवास स्थल था। भारत को 'हिंद' या 'हिंदुस्तान' कहकर भी संबोधित किया जाता है। इसे यह नाम मध्यकालीन इतिहास लेखकों (फारसी, अरबी आदि) ने दिया था। यूनानी लेखकों ने भारत को 'इंडिया' कहा है। 'इंडिया' शब्द की उत्पत्ति यूनानी भाषा के शब्द 'इंडोई' से हुई है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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पृथ्वी की संरचना (Earth Structure) thumbnail
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पृथ्वी की संरचना (Earth Structure)

पृथ्वी का आकार एक 'नारंगी' के समान है, जो ध्रुवों पर चपटी है। कई करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी जलता हुआ आग का गोला थी।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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खगोलीय पिंड- नक्षत्र मण्डल, ध्रुव तारा, ग्रह एवं उपग्रह, ग्रहों की परिक्रमण एवं घूर्णन गति Astronomical Bodies- Constellation, Pole Star, Planets and Sattellite, Rotation of Planets. thumbnail
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खगोलीय पिंड- नक्षत्र मण्डल, ध्रुव तारा, ग्रह एवं उपग्रह, ग्रहों की परिक्रमण एवं घूर्णन गति Astronomical Bodies- Constellation, Pole Star, Planets and Sattellite, Rotation of Planets.

खगोलीय पिंड- सूर्य, चंद्रमा तथा वे सभी वस्तुएं जो रात के समय आसमान में चमकते हैं, खगोलीय पिंड कहलाते हैं। कुछ खगोलीय पिंड बड़े आकार वाले तथा गर्म होते हैं। ये गैसों से बने होते हैं। इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है, जिसे वे बहुत बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं। इन खगोलीय पिण्डों को तारा कहते हैं। तारे टिमटिमाते हैं। सूर्य भी एक तारा है।

Published: January 01, 1970 05:01AM | Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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