भारत में खनिज उत्पादक राज्य | Major Minerals of India
भारत में बहुतायत मात्रा में खनिज पदार्थों का उत्पादन होता है। ताँबा, लोहा, बॉक्साइट, मैंगनीज, चूना पत्थर जैसे बहुत सारे खनिज पदार्थों के भंडार हैं।
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भारत में बहुतायत मात्रा में खनिज पदार्थों का उत्पादन होता है। ताँबा, लोहा, बॉक्साइट, मैंगनीज, चूना पत्थर जैसे बहुत सारे खनिज पदार्थों के भंडार हैं।
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पृथ्वी की ऊपरी परत 'मृदा' या 'मिट्टी' कहलाती है। यह धरती पर पौधों की वृद्धि हेतु प्राकृतिक स्रोत के रूप में खनिज लवण, पोषक तत्व तथा जल आदि देती है।
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हमारे भारत को 'मसालों की धरती' के नाम से जाना जाता है। भारत विश्व में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
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सोयाबीन, अरहर, धान, तिल, मूंग, उड़द, लोबिया, रागी, बाजरा, तंबाकू, कपास, मूंगफली आदि। ये वर्षा काल की फसलें कहलाती हैं। Barley, peas, wheat, gram, potato, mustard, flaxseed, lentils, rye etc. These are called winter crops.
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1. बाणसागर परियोजना (Bansagar Project)- यह सोन नदी की परियोजना है। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश राज्य आते हैं।
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जल 'ऑक्सीजन' एवं 'हाइड्रोजन' का योगिक है। पृथ्वी के कुल भू-भाग के लगभग 71% भूभाग में जल है। जल वाले भू-भाग के अंतर्गत पृथ्वी के महासागर, सागर, झीलें, ग्लेशियर नदियाँ आदि आते हैं। Water is a valuable asset, because it is a life-long and basic necessity for humans and animals, trees, plants etc. Water is a natural resource. It should be used economically.
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सुनामी की सर्वाधिक उत्पत्ति प्रशांत महासागर में होती है। अतः प्रशांत महासागर के तट क्षेत्रों में सुनामी के कारण जनधन के अत्यधिक हानि होती है। 26 दिसंबर सन् 2004 को हिंद महासागर में आए भूकंप की वजह से शक्तिशाली सुनामी उत्पन्न हुई। इस वजह से भारी जन - धन की हानि हुई। इसी प्रकार मार्च 2011 में प्रशांत महासागर के पश्चिम क्षेत्र में शक्तिशाली सुनामी आई थी। इस वजह से जापान में जन-धन की बहुत हानि हुई थी एवं अत्यधिक तबाही मच गई थी।
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ज्वार-भाटा सदैव समुद्री सतह पर उत्पन्न होता है। इसकी उत्पत्ति का कारण सूर्य तथा चंद्रमा के आकर्षण बल एवं पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रण बल के प्रभाव के कारण होती है। समुद्री जल स्तर के ऊपर उठने को 'ज्वार' कहा जाता है एवं उसके नीचे गिरने को 'भाटा' कहा जाता है।
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भूकंप (Earthquake) - पृथ्वी के अंतर्जाल तथा बहिर्जाल बलों की वजह से ऊर्जा निष्कासित होती है। इस प्रक्रिया के कारण तरंगे उत्पन्न होती हैं। ये सभी अलग-अलग दिशाओं में फैलकर पृथ्वी पर कंपन उत्पन्न करती हैं। इसे ही 'भूकंप' की संज्ञा दी जाती है। In practical language, the vibration of the earth due to natural phenomena is called earthquake.
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अक्षांश रेखाएँ - पृथ्वी के केंद्र से विषुवत् रेखा को आधार मानकर मापी गई कोणीय दूरी को 'अक्षांश' कहा जाता है। समान अक्षांशों को मिलाने वाली रेखा को 'अक्षांश रेखा' कहा जाता है। यह विषुवत रेखा के समानांतर खींची गई क्षैतिज रेखाएँ होती हैं। प्रति 1 डिग्री की अक्षांशीय दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती है। पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर इसका मान एक जैसा नहीं होता। इसकी लंबाई में परिवर्तन होता रहता है।
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