- BY:RF competition (178)
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शिक्षक का कार्य केवल पढ़ाना नहीं, ज्ञान के सृजन में सहयोग करना भी होता है ।अपने विषय में दक्ष, तत्व चिंतक, कार्य को संतुष्टि के साथ करने वाला, पक्षपात रहित, अल्प आरंंभी और अल्प परिग्रही, बच्चों को वास्तव में समझने वाला, वात्सल्य गुण का धारक, अपने शिष्यों के प्रति सकारात्मकता रखने वाला, धैर्य पूर्वक सुनने की क्षमता वाला, दर्पण के समान स्वच्छ और विद्यार्थियों के प्रति निष्पक्ष भाव वाला, दोष मार्जक, गंभीर, स्वस्थ, प्रतिफल की इच्छा से रहित, सदैव विद्यार्थी की उन्नति की भावना वाला, निःस्वार्थ और अध्यनशील शिक्षक ही सफल शिक्षण कर सकते हैं। ऐसे शिक्षक की अच्छे विद्यालयों की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। 'बसंत पंचमी' के दिन विद्या की देवी 'सरस्वती' का पूजन किया जाता है। यह भारतीय संस्कृति में 'विद्यारंभ दिवस' भी है। 'बसंत पंचमी' सरस्वती का 'प्रकटोत्सव दिवस' है। माँ सरस्वती परमचेतना हैं, जो हमारी बुद्धि, प्रज्ञा और मनोवृत्तियों की संरक्षिका है। ज्ञान और कौशल की देवी माँ सरस्वती के 'जन्मदिवस' को 'विद्यालय दिवस' के रूप में देना अंततः भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
Published: January 01, 1970 05:01AM
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