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उत्तरी भारत के विशाल मैदान को 'गंगा, ब्रह्मपुत्र नदियों का मैदान' भी कहा जाता है। क्योंकि इस विशाल मैदान का निर्माण मुख्यतः सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादो के निक्षेपण के द्वारा हुआ है। यह मैदान पश्चिम दिशा में 'सिंधु नदी' से लेकर पूर्व दिशा में 'ब्रह्मपुत्र नदी' तक विस्तृत है। यह विशाल मैदान समतल है और इसके उच्चावच में अंतर बहुत कम है। यह मैदान पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3,200 किलोमीटर लंबा है। इस मैदान की चौड़ाई लगभग 1,50 से 3,00 किलोमीटर है। यह मैदान समुद्र तल से लगभग 50 से 1,50 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मैदान कृषि कार्य के लिए बहुत उपयुक्त है। क्योंकि यहां की मिट्टी उपजाऊ है तथा यहां पर उपयुक्त जलवायु है एवं पर्याप्त जलापूर्ति होती है।
Published: January 01, 1970 05:01AM
| Updated: अभी तक अद्यतन नहीं किया गया है।
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