कश्मीर के इतिहास का ग्रंथ- कल्हण कृत राजतंरगिणी || The book on the history of Kashmir- Rajatargini by Kalhan
कश्मीर में हिंदू शासकों का शासन रहा है। इन हिंदू शासकों और उनके राज्यों के विषय में 'राजतरंगिणी' में लिखा गया है।
Read more
कश्मीर में हिंदू शासकों का शासन रहा है। इन हिंदू शासकों और उनके राज्यों के विषय में 'राजतरंगिणी' में लिखा गया है।
Read more
भारतवर्ष के बंगाल से पाल वंश का पतन होने के बाद सेन राजवंश के शासकों का शासन आरंभ हुआ। यह बंगाल का महत्वपूर्ण राजवंश है।
Read more
पाल शासकों का शासन संपूर्ण बंगाल, कन्नौज और बिहार में विस्तृत था और सीमाएंँ खाड़ी से लेकर दिल्ली तक एवं जालंधर से लेकर विंध्य पर्वत तक फैली हुई थीं।
Read more
भारतवर्ष से सम्राट हर्षवर्धन का शासन समाप्त होने के बाद कन्नौज विभिन्न शासकों की शक्तियों का केंद्र बन गया।
Read more
सम्राट हर्षवर्धन ने 606 से 647 ईसवी तक शासन किया। जब उन्होंने थानेश्वर के प्रशासन को अपने हाथ में लिया तब उनकी आयु केवल 16 वर्ष थी।
Read more
गुप्त राजवंश का पतन होने के पश्चात कुछ नए राजवंशों का उदय हुआ। इनमें से प्रमुख राजवंश निम्नलिखित हैं- पुष्यभूति राजवंश, मैत्रक राजवंश, मौखरि राजवंश आदि।
Read more
मध्य प्रदेश की पुरातात्विक विरासतों में भीमबैटका, डाँगवाला, एरण, कायथा, बेसनगर, नावदा टोली, आदमगढ़, इन्द्रगढ़, आवरा आदि स्थल हैं।
Read more
शकों का मूल निवास सीरिया था। ये बोलन दर्रे से भारत में आए थे। शकों को 'सीथीयन' भी कहा जाता है।
Read more
गुप्त वंश अपने आरंभिक काल में वर्तमान उत्तर प्रदेश तथा बिहार तक सीमित था। इन शासकों का उत्तर प्रदेश में अधिक महत्व था।
Read more
चार्टर अधिनियम (1813)- इस अधिनियम को 'ईस्ट इंडिया कंपनी' ने लाया था। इसके अंतर्गत कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया।
Read more