पंचकोशीय सिद्धांत – अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय कोश || कोशों का विकास कैसे होता है? || FLN Training Teachers
तैत्रीय उपनिषद् पंच कोशों और उनके विकास की संकल्पना देता है। इसके अनुसार अन्नमय कोश से आरम्भ होकर आनन्दमय कोश तक हमारे अस्तित्व के पाँच आवरण हैं जिन्हें कोश कहते हैं।
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