रस किसे कहते हैं, रस के प्रकार और इसके अंग | Ras kya hai- ras ke prakar aur iske ang
रस के प्रकार 10 हैं। कार्य या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे 'रस' कहते हैं।
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रस के प्रकार 10 हैं। कार्य या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे 'रस' कहते हैं।
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हिन्दी साहित्य के कुछ लेखकों यथा - आचार्य रामचंद्र शुक्ल, उषा प्रियंवदा, उदय शंकर भट्ट, डॉ. रघुवीर सिंह, शरद जोशी, रामनारायण उपाध्याय का परिचय यहाँ दिया गया है।
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हिन्दी साहित्य के कवि परिचय में - सूरदास, तुलसीदास, केशवदास, मीराबाई, कबीर दास, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद का परिचय यहाँ दिया गया है।
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काव्य के प्रकारों में मुख्य दो प्रकार हैं- 1. श्रव्य काव्य 2. दृश्य काव्य। श्रव्य काव्य के दो प्रकार हैं- 1. प्रबंध काव्य, 2. मुक्तक काव्य।
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हिंदी साहित्य के इतिहास को चार भागों में विभाजित किया गया है- 1. आदिकाल (वीरगाथाकाल) 2. पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल) 3. उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल) 4. आधुनिक काल में बाँटा गया है।
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गद्य साहित्य की गौण विधाओं में जीवनी, आत्मकथा, आलोचना, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, यात्रा-साहित्य, पत्र-साहित्य, साक्षात्कार-साहित्य, गद्य काव्य, डायरी, लघु कथा आदि सम्मिलित हैं।
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हिन्दी गद्य की प्रमुख विधाएँ निम्नलिखित हैं― निबंध, नाटक, एकांकी, उपन्यास, कहानी। इस विधा के प्रमुख रचनाकार एवं उनकी रचनाएँ भी वर्णित की गई हैं।
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छुट्टी के लिए प्रधान अध्यापक को आवेदन पत्र का लिखना प्राथमिक स्तर पर ही विद्यार्थियों को सिखाया जाता है।
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प्राथमिक शाला में अध्ययनरत विद्यार्थियों हेतु पाठशाला का निबंध कैसे लिखें यह जानकारी आवश्यक होती है।
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हिन्दी में पत्र लेखन विधा- 'माताजी को पत्र' का अपना एक स्थान है। पत्र लेखन का ज्ञान विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है।
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