माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा हेतु भाषायी समझ एवं अवबोध अभ्यास प्रश्न
टीईटी परीक्षा की तैयारी के लिए गद्यांश, पद्यांश, व्याकरण और उत्तर शीट सहित महत्वपूर्ण अभ्यास सेट
भाषायी समझ / अवबोध - माध्यमिक शिक्षक अभ्यास हेतु
माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के भाषायी समझ / अवबोध सिलेबस के अनुसार अभ्यास हेतु एक गद्यांश और एक पद्यांश नीचे दिए गए हैं। दोनों के साथ चार-चार वैकल्पिक प्रश्न और सबसे नीचे उत्तर शीट दी गई है।
खण्ड 'अ': गद्यांश
अपठित गद्यांश सामाजिक समरसता और तात्कालिक जीवन मूल्यों पर आधारित है:
"आज के वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भौतिक प्रगति ने मनुष्य को सुविधाएँ तो बहुत दी हैं, किंतु उसके आपसी संबंधों में दूरियाँ भी बढ़ा दी हैं। समाज में व्यक्ति-केन्द्रित जीवन शैली जोर पकड़ रही है, जिससे मानवीय संवेदनाएँ और सहृदयता धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं। सच्ची सामाजिक समरसता केवल कानूनों या भाषणों से स्थापित नहीं हो सकती, इसके लिए हृदय की विशालता और एक-दूसरे के प्रति आदर भाव का होना अनिवार्य है। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति जाति, वर्ग और संकीर्णता की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को सर्वोपरि नहीं मानेगा, तब तक एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण समाज की कल्पना अधूरा स्वप्न ही बनी रहेगी। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी शिक्षा और संस्कृति में ऐसे नैतिक मूल्यों को स्थान दें जो व्यक्ति को जोड़ें, न कि तोड़ें।"
प्रश्न 1. गद्यांश के अनुसार भौतिक प्रगति ने मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव डाला है?
(A) आपसी संबंधों में दूरियाँ बढ़ा दी हैं
(B) मानवीय संवेदनाओं को मजबूत किया है
(C) व्यक्ति को पूर्णतः संतोषी बना दिया है
(D) समाज में एकता स्थापित की है
प्रश्न 2. सच्ची सामाजिक समरसता की स्थापना के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त क्या है?
(A) कड़े कानूनों का निर्माण करना
(B) केवल भाषण देना
(C) हृदय की विशालता और आदर भाव का होना
(D) वैज्ञानिक विकास को रोकना
प्रश्न 3. 'व्यक्ति-केन्द्रित' शब्द में किस प्रकार का समास है?
(A) द्वंद्व समास
(B) तत्पुरुष समास
(C) बहुव्रीहि समास
(D) अव्ययीभाव समास
प्रश्न 4. गद्यांश का केंद्रीय भाव या मूल संदेश क्या है?
(A) केवल तकनीकी शिक्षा का प्रसार
(B) मानवता और नैतिक मूल्यों द्वारा सामाजिक समरसता
(C) भौतिक सुख-सुविधाओं का त्याग
(D) कानूनों का कठोर पालन
खण्ड 'ब': पद्यांश
अपठित पद्य:
"बहाते जो अश्रु कणों को, उन्हें हँसाना सीखो तुम।
बुझे हुए दीपों में फिर से, दीप जलाना सीखो तुम।।
कँटों की इस राहिनियों में, फूल खिलाना सीखो तुम।
अंधकार से लड़कर खुद को, सूर्य बनाना सीखो तुम।।
भेदभाव की दीवारों को, आज गिराना सीखो तुम।
इस धरती को स्वर्ग बनाने, आगे बढ़ना सीखो तुम।।"
प्रश्न 5. कविता में 'बुझे हुए दीपों में फिर से दीप जलाने' का क्या आशय है?
(A) दीपक जलाकर रोशनी करना
(B) निराश और हताश लोगों में आशा का संचार करना
(C) बुझे हुए दीये को संभालकर रखना
(D) दीपक बनाने की कला सीखना
प्रश्न 6. 'कँटों की इस राहिनियों में, फूल खिलाना सीखो तुम' पंक्ति में कौन सा अलंकार निहित है?
(A) अनुप्रास और रूपक
(B) यमक और श्लेष
(C) उपमा और उत्प्रेक्षा
(D) अतिशयोक्ति
प्रश्न 7. कविता में किस भावना को बल दिया गया है?
(A) निराशा और पलायनवाद की
(B) स्वार्थ और संकीर्णता की
(C) परोपकार, आशा और समरसता की
(D) उदासीनता की
प्रश्न 8. 'अंधकार' शब्द का पर्यायवाची शब्द निम्नलिखित में से कौन सा नहीं है?
(A) तिमिर
(B) तम
(C) अंधियारा
(D) आलोक
उत्तर शीट
प्रश्न 1. उत्तर (A) आपसी संबंधों में दूरियाँ बढ़ा दी हैं
प्रश्न 2. उत्तर (C) हृदय की विशालता और आदर भाव का होना
प्रश्न 3. उत्तर (B) तत्पुरुष समास
प्रश्न 4. उत्तर (B) मानवता और नैतिक मूल्यों द्वारा सामाजिक समरसता
प्रश्न 5. उत्तर (B) निराश और हताश लोगों में आशा का संचार करना
प्रश्न 6. उत्तर (A) अनुप्रास और रूपक
प्रश्न 7. उत्तर (C) परोपकार, आशा और समरसता की
प्रश्न 8. उत्तर (D) आलोक
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लेखक
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